“किसान कल्याण वर्ष”
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जिले में खेती का बदलता स्वरूप
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युवा किसान ने कलौंजी की खेती से दिखाई नई राह
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परंपरागत फसलों से हटकर औषधीय खेती की ओर बढ़ रहे किसान
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आय बढ़ाने की नई संभावनाएं
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सरकार खेती को लाभ का धंधा बनानें की दिशा में लगातार काम कर रही है, सरकार ने इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष भी घोषित किया है, शासन की नीतियों और विभागीय अधिकारियों की सक्रियता से किसान पारंपरिक फसलो के साथ ही अन्य फसले भी ले रहे है।

जिले में खेती की तस्वीर अब धीरे धीरे बदलती नजर आ रही है। लंबे समय से गेहूं, चना और सोयाबीन जैसी परंपरागत फसलों पर निर्भर रहे किसान अब औषधीय और वैकल्पिक फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इसी बदलाव की एक सशक्त मिसाल दमोह जिले की ग्राम पंचायत खड़ेरी युवा कृषक आकाश शक्ति पटेल द्वारा देखने को मिल रही है, जहां किसान ने कलौंजी की खेती शुरू कर कृषि नवाचार की दिशा में नया प्रयोग किया है।
खेती में लगातार बढ़ती लागत और परंपरागत फसलों में घटते मुनाफे के चलते औषधीय खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प वनकर उभर रही है। बटियागढ़ क्षेत्र में कलौंजी की खेती का यह प्रयास न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक साबित हो सकता है, बल्कि अन्य किसानों को भी नई फसलों की ओर प्रेरित कर रहा है। कलौजी की प्रमुख मंडी नीमच मानी जाती है। वर्तमान में नीमच मंडी में कलौंजी का भाव 20 हजार से 30 हजार प्रति क्विटल तक बताया जा रहा है। इस बाजार भाव को देखते हुए किसानों को इस फसल से परंपरागत फसलों की तुलना में कहीं अधिक मुनाफा मिलने की उम्मीद है। यदि उत्पादन अनुमान के अनुरूप रहा, तो कम रकबे में भी अच्छी आमदनी संभव है।
ग्राम पंचायत खड़ेरी के किसान आकाश पटेल ने बताया कि आयुष विभाग के जिला अधिकारी राजकुमार पटेल के मार्गदर्शन में एक एकड़ भूमि में कलौंजी की खेती कर नया प्रयोग किया है। किसान के अनुसार, कलौंजी एक महत्वपूर्ण औषधीय फसल है, जिसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है। सही तकनीक और देखभाल के साथ एक एकड़ से 4 से 5 क्विटल तक उत्पादन की संभावना रहती है।
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