मध्य प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के भविष्य को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने शिक्षा जगत में हलचल तेज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) में दी जाने वाली छूट की सीमा समाप्त हो चुकी है और अब किसी भी शिक्षक की नियुक्ति या सेवा जारी रखने के लिए इस परीक्षा को पास करना अनिवार्य होगा। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के कड़े नियमों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि 2017 में नियम लागू होने के बाद पांच साल की रियायत पहले ही दी जा चुकी है, इसलिए अब नियमों के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

यह पूरा विवाद वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त हुए उन शिक्षकों से जुड़ा है, जिनकी भर्ती राज्य सरकार की मेरिट प्रक्रिया के आधार पर हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के एक पिछले आदेश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों के लिए भी पात्रता परीक्षा को अनिवार्य कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थीं, जिसमें मांग की गई थी कि पुराने अनुभवी शिक्षकों को इस परीक्षा से छूट दी जाए। हालांकि, सुनवाई के दौरान जजों की टिप्पणियों से स्पष्ट हुआ कि नियमों का पालन सभी को करना होगा और जो शिक्षक इस परीक्षा में फेल होंगे, उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे लगातार मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के माध्यम से राहत की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट का वर्तमान रुख उनके पक्ष में नहीं दिख रहा है। जनजातीय कल्याण शिक्षक संघ के अनुसार, वकीलों की मजबूत दलीलों के बावजूद अदालत शिक्षा की गुणवत्ता और तय मानकों को लेकर बेहद सख्त है। हालांकि, 70 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई अभी जारी है, लेकिन राहत मिलने की उम्मीदें काफी कम नजर आ रही हैं। यदि अंतिम निर्णय भी इसी दिशा में आता है, तो प्रदेश भर के हजारों शिक्षकों के लिए अपनी सेवा बचाना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा। #MPKiBaat #tet #teachers #SupremeCourt #MadhyaPradesh #MPTeachers #MPNews #bignews #facebookpost
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