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भोपाल सुरक्षित बचपन सुरक्षित भविष्य”
दमोह-पन्ना मुख्य मार्ग पर ‘अंधियारा बगीचा’ बना जाम का टापू: शासन-प्रशासन बेखबर, नेताओं की चुप्पी पर उठे सवाल
मध्य प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के भविष्य को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने शिक्षा जगत में हलचल तेज कर दी है।
एमपीटी के रेस्टोरेंट में भूले ज्वेलरी से भरा बैग, लौटाया:शादी में उज्जैन गया था भोपाल का परिवार; कर्मचारियों ने संभालकर रखा
प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को सिर्फ कार्रवाई दिखाने के बजाय पारदर्शिता भी रखनी चाहिए पत्रकार श्रीराम सिंह 9111344599 रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा थाना क्षेत्र से एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है। ग्राम अलदा में पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग एक लाख ईंट जप्त करने का दावा किया है। प्रशासन का कहना है कि ग्राम निवासी लखन लाल वर्मा द्वारा अवैध रूप से ईंटों का भंडारण किया गया था और वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कार्रवाई की गई। लेकिन अब इस पूरे मामले को लेकर गांव में कई सवाल खड़े होने लगे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन सिर्फ छोटे लोगों पर कार्रवाई कर अपनी उपलब्धि गिनाने में लगा हुआ है, जबकि क्षेत्र में बड़े स्तर पर चल रहे अवैध कारोबारों पर चुप्पी साध ली जाती है। तिल्दा-नेवरा पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ग्राम अलदा पहुंची, जहां मौके पर भारी मात्रा में ईंटों का भंडारण मिला। प्रशासन ने दावा किया कि लगभग एक लाख ईंट बिना वैध अनुमति के रखी गई थीं। इसके बाद ईंटों को जप्त कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर ईंटों का भंडारण एक दिन में तो नहीं हुआ होगा। यदि लंबे समय से यह काम चल रहा था, तो प्रशासन अब तक क्या कर रहा था? क्या स्थानीय अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर शिकायत आने तक आंखें बंद रखी गई थीं? ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कई जगहों पर ऐसे कई जगह तिल्दा ब्लाक में कई जगह पर अवैध उत्खनन, मुरुम खनन, ईंट भट्टों और जमीन संबंधी अनियमितताओं की शिकायतें लगातार होती रही हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ चुनिंदा मामलों में ही दिखाई देती है। लोगों का आरोप है कि जब छोटे किसान या ग्रामीण अपने रोजगार के लिए कोई काम करते हैं, तब प्रशासन सख्ती दिखाने पहुंच जाता है, लेकिन बड़े रसूखदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शायद ही कभी नजर आती है। स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि दस्तावेजों की कमी थी, तो पहले नोटिस देकर प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की गई? सीधे जप्ती की कार्रवाई से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को सिर्फ कार्रवाई दिखाने के बजाय पारदर्शिता भी रखनी चाहिए। इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि अवैध उत्खनन और राजस्व नियमों के उल्लंघन के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा। लेकिन जनता पूछ रही है कि क्या यह अभियान सभी पर समान रूप से लागू होगा, या फिर सिर्फ कमजोर और साधारण लोगों तक ही सीमित रहेगा? ग्राम अलदा पहले से ही कई प्रशासनिक विवादों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में अब यह कार्रवाई भी नए विवाद को जन्म देती नजर आ रही है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन निष्पक्ष जांच करे और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो पूरी श्रृंखला की जांच हो, ताकि केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आ सके फिलहाल प्रशासन अपनी कार्रवाई को नियमों के तहत बता रहा है, लेकिन गांव में उठ रहे सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि मामला सिर्फ ईंट जप्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली और निष्पक्षता पर भी बहस शुरू हो चुकी है। अब देखना होगा कि जांच आगे क्या मोड़ लेती है और क्या प्रशासन जनता के सवालों का जवाब दे पाएगा।

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दमोह-पन्ना मुख्य मार्ग पर ‘अंधियारा बगीचा’ बना जाम का टापू: शासन-प्रशासन बेखबर, नेताओं की चुप्पी पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के भविष्य को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने शिक्षा जगत में हलचल तेज कर दी है।

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प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को सिर्फ कार्रवाई दिखाने के बजाय पारदर्शिता भी रखनी चाहिए पत्रकार श्रीराम सिंह 9111344599 रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा थाना क्षेत्र से एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है। ग्राम अलदा में पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग एक लाख ईंट जप्त करने का दावा किया है। प्रशासन का कहना है कि ग्राम निवासी लखन लाल वर्मा द्वारा अवैध रूप से ईंटों का भंडारण किया गया था और वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कार्रवाई की गई। लेकिन अब इस पूरे मामले को लेकर गांव में कई सवाल खड़े होने लगे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन सिर्फ छोटे लोगों पर कार्रवाई कर अपनी उपलब्धि गिनाने में लगा हुआ है, जबकि क्षेत्र में बड़े स्तर पर चल रहे अवैध कारोबारों पर चुप्पी साध ली जाती है। तिल्दा-नेवरा पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ग्राम अलदा पहुंची, जहां मौके पर भारी मात्रा में ईंटों का भंडारण मिला। प्रशासन ने दावा किया कि लगभग एक लाख ईंट बिना वैध अनुमति के रखी गई थीं। इसके बाद ईंटों को जप्त कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर ईंटों का भंडारण एक दिन में तो नहीं हुआ होगा। यदि लंबे समय से यह काम चल रहा था, तो प्रशासन अब तक क्या कर रहा था? क्या स्थानीय अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर शिकायत आने तक आंखें बंद रखी गई थीं? ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कई जगहों पर ऐसे कई जगह तिल्दा ब्लाक में कई जगह पर अवैध उत्खनन, मुरुम खनन, ईंट भट्टों और जमीन संबंधी अनियमितताओं की शिकायतें लगातार होती रही हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ चुनिंदा मामलों में ही दिखाई देती है। लोगों का आरोप है कि जब छोटे किसान या ग्रामीण अपने रोजगार के लिए कोई काम करते हैं, तब प्रशासन सख्ती दिखाने पहुंच जाता है, लेकिन बड़े रसूखदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शायद ही कभी नजर आती है। स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि दस्तावेजों की कमी थी, तो पहले नोटिस देकर प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की गई? सीधे जप्ती की कार्रवाई से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को सिर्फ कार्रवाई दिखाने के बजाय पारदर्शिता भी रखनी चाहिए। इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि अवैध उत्खनन और राजस्व नियमों के उल्लंघन के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा। लेकिन जनता पूछ रही है कि क्या यह अभियान सभी पर समान रूप से लागू होगा, या फिर सिर्फ कमजोर और साधारण लोगों तक ही सीमित रहेगा? ग्राम अलदा पहले से ही कई प्रशासनिक विवादों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में अब यह कार्रवाई भी नए विवाद को जन्म देती नजर आ रही है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन निष्पक्ष जांच करे और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो पूरी श्रृंखला की जांच हो, ताकि केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आ सके फिलहाल प्रशासन अपनी कार्रवाई को नियमों के तहत बता रहा है, लेकिन गांव में उठ रहे सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि मामला सिर्फ ईंट जप्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली और निष्पक्षता पर भी बहस शुरू हो चुकी है। अब देखना होगा कि जांच आगे क्या मोड़ लेती है और क्या प्रशासन जनता के सवालों का जवाब दे पाएगा।

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