समाज के प्रेरणा स्रोत ” बैजनाथ दादा जी ” कोई चलता पद चिन्हों पर,
कोई पदचिन्ह बनाता है। है वही सूरमा इस जग में जो अपनी राह बनाता है।
भारत देश साहित्य का महासागर हैं जिसमें सकारात्मक प्रेरणादायक भावों का विशाल एवं अथाह ज्ञान भंडार भरा पड़ा हुआ है। जिसमें महापुरुष की जीवनियाँ, उनके द्वारा समाज हितार्थ किये हुए उत्कृष्ट कार्य जिनसे समाज को लाभ होता है,वर्णन प्राप्त होता है । उनके उन गुणों का विशेषरूप से वर्णन, जिनका अनुसरण कर व्यक्ति के व्यक्तित्व एवं कार्य प्रणाली में सुधार होता जिसके फलस्वरूप समाज में सकारात्मक,उन्नतिशील गुणों की एक निरन्तरता बनी रहती है। एक विचारक एवं लेखक होने के नाते मेरे मस्तिष्क में चिन्तन आया की आया की अक्सर किसी की मृत्यु के बाद, स्वर्गीय व्यक्ति के गुणों,उसके सामाजिक कार्यों की तारीफ होती हैं जो एक अच्छा एवं आवश्यक कार्य है। लेकिन जो स्वयं को फर्श से अर्श तक ले गया हो,जिसने कठिनाइयों को पार करते हुए, समाज में अमूल्य योगदान दियें हों, जिसने समाज में आज से 30-40 वर्षं पूर्व समाज में फैली कुरीतियों को बंद करवाने एवं समाज में सर्व वर्ग हितेषी नयी सकारात्कम दिशाओं में आगे बढाने का प्रयास किया हो, जिसने निरंतर स्वयं को समाज सेवा में झोंक दिया है उनके बारे में अवश्य लिखना चाहिए | जिससे मेरी समझ से दो लाभ होंगे, प्रथम लाभ समाज को अच्छे कार्य को पढने से प्रेरणा मिलेगी, कुछ लोग अनुसरण कर आगे बढेंगें,समाज के लिये कुछ कर दिखायेंगे,द्वितीय लाभ जो प्रेरक से मिलना चाहते हों, उनसे कुछ समझना चाहते हों,सीखना चाहते हों,येंसे जिज्ञासु,कर्मठ, जुझारू, जो जीवन में समाज में सेवा कार्य कर विशेष रूप से आगे बढना चाहते, प्रेरक से प्रत्यक्ष मिलकर, विचार विमर्श कर, मार्गदर्शन लेकर लाभ ले सकते हैं ।

एक येंसे व्यक्ति जो हम सभी के प्रेरणा स्रोत हैं, बैजनाथ दादा जी जिनका जन्मकुर्मी समाज के सबसे गरीब परिवार में 01 जुलाई 1949 को दमोह जिले के मोठा गाँव में हुआ था | उस समय अतिपिछड़ेपन के कारण गावं में प्राथमिक विद्यालय न होने के कारण, आपने मामा जी के
इधर ग्राम रियाना में प्रारम्भिक शिक्षा पूर्ण की लेकिन पांचवी कक्षा बकायन से पास की जहाँ आप प्रतिदिन पैदल ही विद्यालय जाते थे, माध्यमिक शिक्षा भी 6 किमी दूर फुटेरा गांव पैदल ही जाकर पूर्ण की एवं कक्षा ८ वी से 11 कालेजी शिक्षा दमोह में पूर्ण हुई । आपके छात्र जीवन की प्रतिभा व गुणों के कारण गुरुजन भी अध्ययन के साथ-साथ विशेष कार्य प्रदान करते थें जैसे जब आप कक्षा सातवीं में अध्ययन करते थे तब आपसे कक्षा आठवीं के प्रश्नों के पूछे जाते एवं वो प्रश्न जो कक्षा आठवीं के छात्रों को नहीं आते थे,साथ ही साथ कक्षा छटवीं के प्रश्न पत्र भी आपके द्वारा चेक करवाते थे। जिसमें गुरुजनों का एक परम उदेश्य छुपा रहता था प्रतिभा की मदद एवं उसका सम्मान करना एवं विद्यालय में अन्य बच्चों को मेहनत व अध्ययन के प्रति रूचि जागरण एवं प्रेरणा प्रदान करना |
आप जब बीएस.सी.में अध्ययन रत थे, जिले एवं राज्य में अंग्रेजी भाषा भगाओ आन्दोलन जोर पर होने के कारण आपकी स्नातक की शिक्षा बीच में ही रुक गई एवं गाँव वापिस जाना पड़ा | गाँव में पिताजी के साथ पैतृक कृषि कार्य में हाथ बटाना प्रारंभ कर दिया, इस प्रकार 1968 से 1975 तक खेती के सभी कार्यों को पूर्ण लगन से करना एवं अपने कैरियर के बारे में चिंतित रहना दिनचर्या का भाग रहा | कहते हैं –

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जहाँ चाह,वहां राह (Where is will, there is way)
सन 1975 जब देश में इमरजेंसी काल चल रहा था उसी समय मैरिट आधार पर आपका पटवारी पद पर चयन हुआ जहाँ से आपके जीवन का मुख्य काल प्रारंभ होता है ।
प्रकृति का सिद्धांत- कार्य, कार्य करने वाले का चयन करता है (Work search for worker) जैसे ही आपका पटवारी पद पर चयन हुआ, बकायन गाँव में जहाँ आपकी प्रथम पटवारी के रूप में कार्य प्रारम्भ हुआ,उसके पांच दिनों के बाद ही प्रशासन की ओर आपको बहुत ही महत्वूर्ण जबाबदारी सौंपी गई। जिसमें सागर संभाग के पांच जिलों के नए भारतीय प्रशासनिक सेवकों (New I.A.S.) को
पटवारी स्तर के प्रशिक्षण का कार्य सौपा गया जिसे आपने बखूबी सफलता पूर्वक संपन्न करवाया। 1 अक्टोबर 1977 से आपकी पद स्थापना जंगली एवं उस समय के खतरनाक क्षेत्र, ग्राम राजपुरा में
हुई, जहाँ निरक्षरता,पुरानी गुंडागिरी, दादागिरी का बोलबाला था जिस कारण से शासकीय कर्मचारी को कार्य करना काफी दुष्कर एवं कठिन कार्य था क्योंकि उस समय अधुनिक समय जैसी साक्षरता,आवागमन एवं दूर संचार की व्यवस्थाएं नहीं थी । लेकिन
जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ, तूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ
उसे क्या रोकेगा जमाना, उसे क्या रोकेगा जमाना …….?
पग पग पर छुटमुट बड़े स्थानीय अनपढ गुंडों से सामना, जिस कारण से एक तरफ स्वयं को सुरक्षित रखना दूसरी तरफ शासन की योजनाओं को नियम से एवं पूर्ण तरीके से लागू करवाने का जूनून,धीरे धीरे मकसद पूर्णता की ओर बढता गया । उस समय सामाजिक विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी 1977 से 1979 के मध्य शासन के नियमानुसार छोटे घास की जमीन के पट्टों को गरीबों को दिलवाया जो की कम समय में 1200 एकड़ का एक एतिहासिक रिकार्ड दर्ज हुआ, जिससे उधर के गरीब लोग आपको पटवारी की जगह शासकीय मसीहा की तरह सम्मान देने लगे |
1985 में आपके उत्कृष्ट कार्यों एवं परिणामों के कारण आपका स्थान्तरण हटा स्थानीय हो गया जहाँ आपने 1987 तक सेवाएं प्रदान की । निरंतर आशा से बेहतर सरकारी सेवाओं के सुपरिणाम प्राप्ति के कारण आपकी पद स्थापना 11 अगस्त 1987 जिला दमोह स्थानीय हो गई, जहां आपने 200 5 तक सेवाएं प्रदान की एवं 200 5 में समाज सेवा जूनून व अति लगन के कारण सरकारी कार्य से स्वेच्छिक अवकाश ले लिया |
जैसे ही दमोह जिले में आपकी पदस्थापना हुई, आपकी सहयोग भावना, संघठनात्मक संचालन गुण एवं सहकर्मचारियों की चाह के कारण आप पटवारी संघ के अध्यक्ष बने एवं 1990 से 2000 सफलता पूर्वक पद निर्वहन कार्य किया ।
अपने कैरियर एवं परिवार संचालन के साथ-साथ जीवन में समाज सेवा का कार्य प्रारंभ से ही चल रहा था एवं 1989 में आपने कुर्मी सामाज संगठन निर्माण का प्रयास प्रारम्भ किया एवं शीघ्र ही जिला दमोह कोपओटीरेटिव बैंक सभा हाल में राज्यस्तरीय कुर्मी समाज का बृहत कार्यक्रम सम्पन्न करवाया। उक्त बृहत कार्यक्रम के सफल आयोजन के सकारात्मक परिणाम स्वरुप आपको कुर्मी समाज की राज्य स्तरीय समिति में महामंत्री के पद से सम्मानित किया गया ।
सामाजिक कुरीतियों को दूर करने दिली इच्छा जो बचपन से ही थी अब पल्लवित होती जा रही थी एवं 1990 में बांदकपुर धाम में सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया एवं सेमरा बुजुर्ग के शंकर मासाब जी के लड़के का सामाजिक संगठन में विवाह सम्पन्न करवाया जो दमोज जिले की सामाजिक सुधार की प्रथम लौ प्रकटन अवस्था थी | आप दमोह जिले कुर्मी समाज के प्रथम अध्यक्ष रहे जिस समय लोग कुर्मी समाज संगठन जैसे रचनात्मक कार्य से अनभिज्ञ थे।
दमोह जिले के लक्ष्मण कुटी धाम में कुर्मी समाज संगठन के द्वारा 1992 में कुर्मी समाज का विशाल राज्यस्तरीय कार्यक्रम एवं उस कार्यक्रम में सैकड़ो युवक-युवतियों के जोड़ो का विवाह समाज संगठन के द्वारा संपन्न हुए जो दमोह जिले में समस्त समाजों में प्रथम एवं प्रभावशाली,सकारात्मक,समाज सुधारात्मक कदम था। जो मात्र दमोह जिलों की समाज को ही नहीं बल्कि मप्र के अन्य जिलों को सामाजिक कुरीति उन्मूलन में मील का पत्थर साबित हुआ |

आपने स्वयं अपने दों पुत्रों का विवाह बिना दहेज़ के, कुर्मी सामूहिक आदर्श विवाह सम्मलेन लक्षमण कुटी में ही सम्पन्न करवाया एवं कथनी करनी समानता का समाज में उदाहरण पेश किया। आपने 1993 से तेरहवीं (मृत्यु भोज) जैसी सामाजिक कुरीति बंद करवाने हेतु निरंतर प्रयास किये जिससे समाज में काफी परिवारों ने तेरहवीं बंद कर दी । आपने स्वयं की माता जी की भी तेरहवी नहीं की जो आपका एक तारीफेकाबिल कार्य था जिस वजह से लोग काफी मात्रा में प्रभावित हुए एवं कुरीति उन्मूलन आन्दोलन की गति मेंज वृद्धि हुई ।
समाज के लिये निरंतर दान – दानं भोगं नाशस्तिस्रो गतयो भवन्ति वित्तस्य । यो न ददाति न भुङ्क्ते तस्य तृतिया गतिर्भवति ॥ शास्त्र कहते हैं, धन की संभव तीन गति होती है । अर्जित धन का दान, दूसरी गति उसका भोग और तीसरी गति है उसका नाश । जो व्यक्ति अर्जित धन समाज में दान नहीं देता है और न ही उसका स्वयं भोग करता है, उसके धन की तीसरी गति होती है, अर्थात धन का नाश । आपके मन मस्तिष्क एवं दिल में बचपन से समाज मदद की भावना कूटकूट कर भरी हुई थी । बाल्यकाल काल में मन से दान, सहपाठियों को शिक्षा में मदद शासकीय कार्यकाल में संभवतः यथायोग्य जनता विशेषकर गरीब जनता
की मदद का कार्य एवं जैसे ही जीवन में स्व- मेहनत व ईश्वर कृपा से धन आगमन हुआ, आपके द्वारा मात्र कुर्मी समाज में ही नहीं बल्कि अन्य समाज हितार्थ आप जिले में सबसे पहले व एवं यथासंभव अधिकतम दान करते है ? सत्यं किम् प्रमाणम् प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम् ? प्रत्यक्ष प्रमाण समाज के सामने है।

जिसके कुछ उदाहरण निम्न हैं
(1)आपने कुर्मी समाज के लिये हटा में स्वयं जमीन प्रदान की। (2)आपने प्रांतीय पटवारी अधिवेशन बांदकपुर धाम में करवाया ।
(3) आपने सरदार पटैल ट्रस्ट के लिये धन राशी दान की । (4) पिछड़ावर्ग समाज के लिये धनराशि दान में दी।
(5) पूर्व वर्णित सामाजिक कार्यक्रमों में आपने समय-समय पर खुले मन से धन राशि दान में की।
इस प्रकार आपका प्रारम्भ से संघर्षमय जीवन रहा फिर भी सकारात्मक भाव, जुनून, लगन, कुछ बनकर समाज सेवा कार्य करने भाव रहा, जो समय के साथ बढता गया गया एवं परिणामों में परिणित होता गया। परिणाम भी येंसा जो कि दमोह जिले की ही नहीं बल्कि राज्य स्तर पर समाज के सामने आइना की तरह स्पष्ट है।
लेखक- ज्योतिषाचार्य रज्जन प्रसाद पटैल एम.ए. ज्योतिर्विज्ञान, पीएच. डी. (रिसर्च स्कालर) श्रीवास्तव कालोनी, दमोह म.प्र. (मो. 9300694736)
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