दमोह एकलव्य विश्वविद्यालय में जैन और प्विभाग द्वारा आयोजितबुंदेलखण्ड की जैन मूर्तिकला एवं स्थापत्य विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न

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एकलव्य विश्वविद्यालय में जैन और प्विभाग द्वारा आयोजितबुंदेलखण्ड की जैन मूर्तिकला एवं स्थापत्य विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न
जैन और प्राकृत अध्ययनf विभाग, एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह मध्यप्रदेश में भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् दिल्ली के सहयोग से दिनांक 13-14 मार्च 2026 को ‘‘बुंदेलखण्ड की जैन मूर्तिकला एवं स्थापत्य’’ विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न हुआ।
सम्मेलन का उद्घाटन सत्र दिनांक 13 मार्च को प्रातः 10 बजे आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता एकलव्य विश्वविद्यालय की कुलाधिपति डाॅ. सुधा मलैया जी ने की, विशिष्ट अतिथि प्रो. जयकुमार उपाध्ये, दिल्ली एवं प्रतिष्ठाचार्य जयकुमार निशान्त, टीकमगढ और सारस्वत अतिथि के. एल. डाबी., उप-संचालक राज्य पुरातत्व विभाग रहे।


उद्घाटन सत्र में बीज वक्तव्य के. एल. डाबी. जी जबलपुर ने स्वागत वक्तव्य कुलगुरु प्रो. पवनकुमार जैन ने, मंच संचालन डाॅ. आशीष कुमार जैन संस्कृत विभाग ने एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. ऋषभचन्द्र जैन ‘फौजदार’ ने दिया, उद्घाटन सत्र में 4 शोध पत्र प्रस्तुत किये गये।
द्वितीय सत्र दोपहर 2 बजे प्रारम्भ हुआ, जिसकी अध्यक्षता प्रो. जयकुमार उपाध्ये, दिल्ली ने की जिसमें 4 शोध आलेख प्रस्तुत हुए और तृतीय सत्र दोपहर 3ः30 बजे प्रारम्भ हुआ जिसकी अध्यक्षता प्रो. ऋषभचन्द्र जैन फौजदार ने की, जिसमें 5 शोध आलेख प्रस्तुत हुए।
दिनांक 14 मार्च को चतुर्थ सत्र प्रारम्भ हुआ, जिसकी अध्यक्षता प्रो. नरेन्द्र जैन टीकमगढ ने की, इस सत्र में प्रो. भागचन्द्र जैन भागेन्दु दमोह, डाॅ. आशीष जैन, आचार्य सागर, प्रतिष्ठाचार्य पवन जैन दीवान, प्रतिष्ठाचार्य विनोद जैन, रजवांस, श्री उमेश जैन नोहटा, डाॅ. आशीष कुमार जैन, जैन और प्राकृत अध्ययन विभाग आदि अनेक विद्वानों ने शोध पत्र प्रस्तुत किये। इसके बाद समापन सत्र आयोजित हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय की कुलाधिपति डाॅ. सुधा मलैया जी ने सभी को सम्बोधित किया एवं जैन मूर्ति स्थापत्य के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। अन्त में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. पवन कुमार जैन ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस सम्मेलन में विश्वविद्यालय के सभी प्राध्यपक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे और सभी ने बुंदेलखण्ड की जैन मूर्तिकला एवं स्थापत्य के विषय में अनेक नयी जानकारी प्राप्त की। जिससे अनेक विषय सामने आये, जिन पर आगे शोध हो सकता है। जो विषय शेष रह गए है, जिन पर विभाग द्वारा संपन्न करने का प्रयत्न किया जाएगा|
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