भोपाल क्रांतिनायक राजा हिरदेशाह लोधी की जीवनी अब स्कूल पाठ्यक्रम का बनेगी हिस्सा

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* भोपाल क्रांतिनायक राजा हिरदेशाह लोधी की जीवनी अब स्कूल पाठ्यक्रम का बनेगी हिस्सा*
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राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के आग्रह पर मुख्यमंत्री ने की घोषणा

राजधानी भोपाल का जम्बूरी मैदान आज राष्ट्रभक्ति और शौर्य के गौरवशाली इतिहास का साक्षी बना। ‘नर्मदा टाइगर’ के नाम से विख्यात, 1842 की क्रांति के महानायक राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित ‘शौर्य यात्रा’ में जनसैलाब उमड़ पड़ा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उपस्थित रहे।

इतिहास के विस्मृत पन्नों को मिलेगी नई पहचान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी ने राजा हिरदेशाह जी के बलिदान को याद किया। उन्होंने भावुक और ओजस्वी स्वर में मुख्यमंत्री जी से आग्रह किया कि “जिस महानायक ने 1857 की क्रांति से भी 15 वर्ष पूर्व अंग्रेजों की चूलें हिला दी थीं, उनकी शौर्य गाथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचना अनिवार्य है। अतः उनकी जीवनी को विद्यालयी पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए।”

मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणाएँ

राज्यमंत्री श्री लोधी के इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। मुख्यमंत्री ने मंच से घोषणा की कि राजा हिरदेशाह लोधी की जीवनी पर गहन शोध कराया जाएगा और उसे स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा ताकि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और वास्तविक नायकों से परिचित हो सके। साथ ही, उन्होंने राजा साहब की जन्मस्थली ‘हीरापुर’ को एक भव्य पर्यटन और ऐतिहासिक केंद्र के रूप में विकसित करने का भी संकल्प दोहराया।

इस अवसर पर पूज्य दादा गुरु जी का सानिध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन कैबिनेट मंत्री श्री विजय शाह, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते, विभिन्न जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु उपस्थित रहे। मंत्री श्री लोधी ने अपने संबोधन का समापन अटल जी की पंक्तियों से किया, जिससे पूरा मैदान ‘भारत माता की जय’ और ‘राजा हिरदेशाह अमर रहें’ के नारों से गुंजायमान हो उठा।
यह आयोजन न केवल एक समाज की अस्मिता का प्रतीक था, बल्कि मध्य प्रदेश के गौरवशाली स्वाधीनता इतिहास को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक बड़ा कदम सिद्ध हुआ।

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