विकास के वादे बनाम आदिवासियों का दर्द*

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*विकास के वादे बनाम आदिवासियों का दर्द*

*79 साल बाद भी आदिवासी सड़क को तरसे, बारिश से पहले फिर सिसक उठा गांव*

*सबहेड*

*पीएम सड़क योजना स्वीकृत, नल-जल का दावा… लेकिन हकीकत—एक हैंडपंप, गाँव बारिश में कैद और कंधों पर उठती जिंदगी*

*देवेंद्र रघुवंशी, चाणक्य न्यूज गंजबासौदा/विदिशा।*

देश आजादी के 79 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। मंचों से आदिवासी विकास की योजनाओं का गुणगान पीटा जा रहा है और आंकड़ों में तरक्की चमक रही है… लेकिन इन चमकते दावों के पीछे छुपी सच्चाई को देखना हो तो कुरवाई विधानसभा क्षेत्र और गंजबासौदा जनपद की उदयपुर पंचायत का मजरा टोला खोंगरा चले आइए। जहां आज भी जिंदगी कच्चे रास्तों, अधूरी उम्मीदों और हर साल लौटते दर्द के सहारे सिसक रही है। 2023 के चुनाव में सड़क की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया गया था। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और जल्द सड़क निर्माण का आश्वासन दिया गया। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सहरिया आदिवासी केवल वोट बैंक तक ही सीमित हैं। अब ना कोई उनके आंसू पौंछने वाला दिख रहा है और ना ही कोई व्यवस्था से सवाल करने वाला।
करीब 500 आदिवासी परिवारों की यह बस्ती विकास के नक्शे पर जैसे अब भी धुंधली है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आदिवासी बस्ती नाहरिया से खोंगरा तक करीब 3. 5 किलोमीटर का यह रास्ता प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत करीब 3 साल पहले स्वीकृत हो चुका है, टेंडर भी लग गए लेकिन काम नहीं लगा। खोंगरा निवासी हरिओम पाल ने बताया कि करीब 6 महीने पहले 3 करोड़ 7 लाख की राशि से बनने वाली इस सड़क का पुन:टेंडर स्वीकृत हो चुका है। इसके बावजूद आज तक जमीन पर एक फावड़ा तक नहीं चला। जबकि वन क्षेत्र में ही शामिल पधार से खजूरी सड़क एक माह पूर्व बन चुकी है और खजूरी से दैलवाड़ा तक सड़क आधी बन चुकी है। उधर बरसात इस गांव के लिए मौसम नहीं, मुसीबत का दूसरा नाम है। जैसे ही बारिश होती है, पूरे इलाके में 4 से 5 फीट तक पानी भर जाता है और मजरा टोला टापू बन जाता है। कच्चे घरों में रहने वाले आदिवासी परिवार महीनों तक कैद होकर रह जाते हैं। बाहर निकलना तो दूर, जीवन की सामान्य गतिविधियां भी ठप पड़ जाती हैं। मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे यह सहरिया आदिवासी जब मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचे तो उनका दर्द एक बार फिर झलक उठा। शासन प्रशासन के हर प्लेटफार्म तक अपनी समस्या लिखित मौखिक शिकायतें पहुंचाने के बाद भी परिणाम में आवेदन और सिर्फ आवेदन ही बचें है।
*बारिश में घरों में कैद हो जाते हैं आदिवासी, श्मशान है, लेकिन रास्ता नहीं*
बारिश का समय भी करीब आने वाला है ऐसे में इन आदिवासियों को बरसात के हादसों डर अभी से सता रहा है। बरसात के मौसम में इस बस्ती के हालात भयावह हो जाते हैं। गांव के आसपास 4 से 5 फीट तक पानी भर जाता है, जिससे पूरा इलाका टापू बन जाता है। ग्रामीण अपने कच्चे घरों में कैद होकर रह जाते हैं। बाहर निकलना तो दूर, जरूरी कामों के लिए भी रास्ता नहीं बचता। बारिश आने से पहले ही गांव में चिंता का माहौल है, कहीं फिर वही हालात न दोहराएं। गांव में श्मशान घाट पर टीनशेड तो बना दिया गया है, लेकिन वहां तक जाने के लिए सड़क नहीं है। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों को कमर तक पानी में होकर गुजरना पड़ता है। कई बार हालात इतने खराब हुए कि खुले स्थानों पर ही दाह संस्कार करना पड़ा है।
सड़क नहीं होने का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। बीमार व्यक्ति को चारपाई या कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है। सामान्य बीमारी भी यहां जानलेवा बन जाती है।
*एक हैंडपंप के भरोसे पूरी बस्ती,फाइलों में नल-जल*
जहां सरकार हर घर नल-जल योजना की बात करती है, वहीं इस बस्ती में आज भी एकमात्र हैंडपंप ही आदिवासियों के सूखे कांटो की प्यास बुझाने वाली जीवन रेखा है। गर्मी में पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है और बरसात में कीचड़ के बीच यही एकमात्र सहारा रह जाता है। खोंगरा के ग्रामीण टीकाराम आदिवासी चन्नू, प्रवेश, शैतान, जितेंद्र शिवचरण, भगवान सिंह और पवनसिंह ने बताया कि
3 साल पहले उनकी बस्ती में नल जल योजना के तरह बोर हुआ था, पाइप लाइन जमीन के अंदर बिछानी थी लेकिन जमीन के ऊपर रखे रहे और एक दिन दिखाने के बाद लापता हो गए। बोर में भरपूर पानी के बाद मोटर नहीं डाली जिससे बोर पूरी तरह से पुर गया। पानी को स्टोरेज करने के लिए गाँव में तीन टंकियां बनाई थी वही टंकिया आज व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रही हैं। अब उन्हें यह भी नहीं पता कि नल-जल योजना यहां कब पहुंचेगी। कागजों में दौड़ती फाइलें और धरातल पर ठहरा विकास यही इस सहरिया आदिवासी खोंगरा गांव की सच्चाई है।
*इनका कहना है*
*आदिवासियों की ओर से आवेदन मिला है। सड़क क्यों नहीं बन पा रही इसकी जानकारी लेकर जल्दी ही सड़क का निर्माण शुरू कराया जाएगा।
अनुभा जैन एसडीएम गंजबासौदा*

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