युवाओं में बढ़ रही तंबाकू की लत,अब कैंसर का खतरा:विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता, बोले- नई पीढ़ी को बचाना सबसे बड़ी चुनौती

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31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के मौके पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने युवाओं में बढ़ते तंबाकू सेवन और उससे पैदा हो रहे कैंसर के खतरे को लेकर चिंता जताई है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की कैंसर एंड टोबैको कंट्रोल कमेटी का कहना है कि गुटखा, तंबाकू और निकोटिन उत्पादों की बढ़ती लत अब देश के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अब मुंह का कैंसर केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कम उम्र के युवक-युवतियां भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।

25 साल की उम्र में भी सामने आ रहे कैंसर के मामले

‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत में कैंसर एंड टोबैको कंट्रोल कमेटी, IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिलीप कुमार आचार्य ने बताया कि पहले तंबाकू सेवन से जुड़े कैंसर के मामले आमतौर पर 60 वर्ष की आयु के बाद सामने आते थे, लेकिन अब 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में भी मुंह के कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि कम उम्र में गुटखा और तंबाकू का सेवन शुरू करना, तंबाकू उत्पादों में मौजूद कैंसरकारी रसायनों की बढ़ती मात्रा तथा कमजोर होती प्रतिरोधक क्षमता इसके प्रमुख कारण हैं। उनके अनुसार एक बार निकोटिन की लत लगने के बाद इससे बाहर निकलना बेहद कठिन हो जाता है। इसलिए युवाओं को शुरुआत से ही तंबाकू से दूर रखना सबसे प्रभावी उपाय है।

स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान जरूरी

डॉ. आचार्य का कहना है कि तंबाकू नियंत्रण के लिए केवल प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं। स्कूलों और कॉलेजों में व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि किशोर और युवा तंबाकू के दुष्प्रभावों को समझ सकें और इसकी लत से बच सकें।

युवतियों में भी बढ़ रहा निकोटिन उत्पादों का उपयोग

डॉ. आचार्य ने बताया कि हाल के वर्षों में कॉलेज जाने वाली युवतियों के बीच भी तंबाकू और निकोटिन उत्पादों के उपयोग की प्रवृत्ति बढ़ती दिखाई दे रही है। भले ही इसके सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन चिकित्सकीय अनुभवों में यह बदलाव स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं में तंबाकू सेवन के कारण मासिक धर्म संबंधी समस्याएं, गर्भपात का खतरा, गर्भावस्था में जटिलताएं और प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यदि गर्भवती महिला तंबाकू का सेवन करती है तो उसका सीधा प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है। इससे समय पूर्व प्रसव, शिशु मृत्यु सिंड्रोम, जन्मजात विकृतियों और बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

तंबाकू बिक्री पर नियंत्रण की जरूरत

डॉ. आचार्य ने कहा कि तंबाकूयुक्त गुटखा पर प्रतिबंध के बावजूद कंपनियों ने तंबाकू और पान मसाला अलग-अलग पैकेट में बेचने का तरीका निकाल लिया है। लगभग हर दुकान पर तंबाकू और पान मसाले की अलग-अलग पुड़ियां आसानी से उपलब्ध हैं, जिन्हें उपभोक्ता मिलाकर उपयोग कर लेते हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि तंबाकू उत्पादों की बिक्री के लिए ‘वेंडर लाइसेंसिंग सिस्टम’ लागू किया जाना चाहिए। इससे तंबाकू बेचने वाले दुकानदारों का रिकॉर्ड रखा जा सकेगा और बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

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