दमोह पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) में कथा का श्रवण करोड़ों गुना पुण्यफल प्रदान करता है – किशोरी वैष्णवी गर्ग

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पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) में कथा का श्रवण करोड़ों गुना पुण्यफल प्रदान करता है – किशोरी वैष्णवी गर्ग

दमोह – श्री जगदीश स्वामी मंदिर पुराना थाना पुरेना तालाब दमोह में चल रही 26 मई से 1 जून तक श्रीमद् भागवत पुराण कथा में आज कथा व्यास किशोरी वैष्णवी गर्ग जी द्वारा पुरुषोत्तम मास मलमास में किए गए दान पुण्य व्रत, स्नान और पूजा-पाठ करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और सभी कष्टों का निवारण होता है।


अधिकमास के पांचवे और छठे दिन की कथा, और इस दिन क्या दान करे। अधिकमास भगवान विष्णु का महीना है। इस महीने में भगवान विष्णु के लिए व्रत और दान, जप आदि किया जाता है। इसके हर दिन की एक कथा है, इसलिए अधिकमास में आपको हर दिन की कथा पढ़ने के बाद कुछ दान भी करना उत्तम रहता है।

किशोरी जी ने बताया कि जो गुरु आज्ञा का पालन करता है वह दूर रहकर भी गुरुदेव के समीप है।
कथा व्यास किशोरी वैष्णवी गर्ग द्वारा आज
श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस की कथा में मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा और महारास का प्रसंग सुनाया जाता है। यह प्रसंग भक्तों को असीम आनंद और भक्ति रस से भर देता है मुख्य प्रसंग और कथा का सार,बाल लीलाएं
पूतना वध और माखन चोरी:
किशोरी वैष्णवी गर्ग जी ने कथा की शुरुआत में पूतना राक्षसी का वध और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की मनमोहक माखन चोरी व मटकी फोड़ लीला का वर्णन किया। यह दर्शाती है कि भगवान अहंकार और द्वेष का नाश कर प्रेम का विस्तार करते हैं,
गोवर्धन पूजा (इंद्र का मान-मर्दन):गाँव वालों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की सीख देकर, श्रीकृष्ण ने देवराज इंद्र के अभिमान को तोड़ा था। जब इंद्र ने कुपित होकर मूसलाधार बारिश की, तब कान्हा ने अपनी कनिष्ठ (छोटी) उंगली पर पूरा गोवर्धन पर्वत उठाकर बृजवासियों की रक्षा की थी, महारास का प्रसंग
:शरद पूर्णिमा की चाँदनी रात में भगवान कृष्ण द्वारा गोपियों के साथ किया गया महारास कथा का मुख्य आकर्षण । यह जीवात्मा (गोपी) और परमात्मा (कृष्ण) के मिलन का प्रतीक है। भागवत कथा से मुख्य सीख पंचम दिवस की कथा हमें यह संदेश देती है:
अहंकार का त्याग:
गोवर्धन लीला हमें सिखाती है कि घमंड हमेशा टूटता है। ईश्वर की शरण में जाने पर सभी विपत्तियाँ टल जाती है अनन्य भक्ति: गोपियों की तरह ईश्वर से निस्वार्थ प्रेम ही सच्ची भक्ति है।
रविवार को श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह संपन्न होगा, कथा के मुख्य यजमान -समस्त भक्तजन श्री जगदीश स्वामी मंदिर पुराना थाना दमोह।

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