भगवान श्री नेमिनाथ के मोक्षकल्याणक पर निर्वाण लाडू चढाया गया
जिनालयों में गूंजे जयकारें
हटा दमोह।
जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्षकल्याणक महोत्सव नगर के चारों जैन मंदिरों में उत्साह एवं उमंग के साथ मनाया गया। रिमझिम वारिस के साथ ही सुबह से मंदिरों में भक्तों का आना प्रारंभ हो गया था। मंगलाष्टक उपरांत समस्त जैन प्रतिमाओं को प्रक्षालन हुआ, तदुपरांत श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा एवं पूजन हुई, भक्तों के द्वारा निर्वाण लाडू चढाया गया।

मुख्य समारोह श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर परिसर में हुआ, जहां भगवान नेमिनाथ वेदी पर विशाल प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक हुआ। सभी भक्तों ने पीताम्बर वस्त्र धारण करके भजनों की सुमधुर ध्वनि के साथ भगवान नेमिनाथ का अभिषेक किया ।

पंडित अभिषेक डुमडुम जैन ने बताया कि पूर्वजों के बताये अनुसार यह प्रतिमा तीन सौ साल से भी ज्यादा पुरानी है, यह हटा क्षेत्र के ही गैर मुर्रा के नीले पत्थर से बनाई गई है, जो अतिशयकारी भी है। पंडित सोनू प्रवीण जैन ने बताया कि भगवान नेमिनाथ का विवाह जब राजुल के साथ हो रहा था तो उन्होने देखा कि बारात के लिए कई मूक पशुओं को मारा जाना था। जिन्हें देख वहीं से उन्हे वैराग्य के भाव जाग्रत हो गये और गिरनार पर्वतमाला पर जाकर तप त्याग, तपस्या प्रारंभ कर दी एवं गिरनार पर्वत से ही उन्हे मोक्ष हुआ।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुजनों की उपस्थित रही।
