जो कुल 168 एकड़ में फैले हैं और जिनकी कीमत लगभग ₹45 करोड़ बताई जा रही है। यह खुलासा भूमि अभिलेखों की विशेष जांच में सामने आया है। उज्जैन में इस समय बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा विकास और भूमि उपयोग में बदलाव हो रहे हैं -नई सड़कें, हाईवे अपग्रेड और मास्टर प्लान में संशोधन के चलते कृषि भूमि को आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए खोला जा रहा है।
जांच में पाया गया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद खरीदी गई 168 एकड़ में से 111 एकड़ जमीन उन सड़क परियोजनाओं के पास स्थित है, जिनकी घोषणा स्वयं यादव सरकार ने की थी। इन खरीददारों में मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा, उनके बेटे की पत्नी शालिनी यादव, भाई नंदलाल और नारायण यादव, नारायण की पत्नी रेखा, उनके बेटे अभय यादव तथा चचेरे भाई गोविंद और नीलेश यादव के नाम शामिल हैं – कुछ ने सीधे तो कुछ ने चार पारिवारिक रियल एस्टेट कंपनियों के जरिए यह जमीनें खरीदी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले भी परिवार के पास जमीन का भंडार था, लेकिन 13 दिसंबर 2023 को पद संभालने के बाद खरीददारी की रफ्तार काफी तेज हो गई। वर्ष 2025 में, जब राज्य में उज्जैन में स्थायी कुंभ अवसंरचना के प्रस्तावों का स्थानीय विरोध हो रहा था, उसी दौरान परिवार और उसकी कंपनियों ने कम से कम 62 प्लॉट खरीदे, जो 92 एकड़ में फैले हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि परिवार की जमीनें उन कई क्षेत्रों में हैं जहाँ उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत भूमि उपयोग को कृषि से बदलकर आवासीय या व्यावसायिक कर दिया गया। पंड्याखेड़ी में परिवार ने 18 एकड़ जमीन उस क्षेत्र में खरीदी जिसे नए सिरे से व्यावसायिक श्रेणी में रखा गया था। मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके कार्यालय ने भेजी गई प्रश्नावली का कोई जवाब नहीं दिया। वहीं सरकार के अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय को उनके विस्तारित परिवार के जमीन संबंधी कारोबार से जोड़ना उचित नहीं है।
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