दमोह जिला चिकित्सालय विफलता और संवेदनहीनता आम नागरिकों के जीवन पर भारी पड़ रही है।

आपके द्वारा उठाए गए दोनों बिंदु और आगे की कार्रवाई के सुझाव बिल्कुल सटीक और तार्किक हैं। इस पूरी स्थिति को दो मुख्य प्रशासनिक और नैतिक दृष्टिकोणों से देखा जाना चाहिए:

1. संवेदनशीलता का अभाव और ‘रेफरल’ का खेल

* *सिस्टम की विफलता:* जब जिले में चार एम्बुलेंस और आठ जननी एक्सप्रेस वाहन ऑन-पेपर उपलब्ध हैं, तब भी एक गर्भवती महिला को समय पर वाहन न मिलना यह साबित करता है कि *संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि उनके समन्वय (Coordination) और प्रबंधन की भारी कमी है।*
* *नैतिक जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना:* “हमारा काम सिर्फ रेफर करना है” — यह बयान बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। एक डॉक्टर का कर्तव्य सिर्फ कागजी कार्रवाई पूरी करना नहीं, बल्कि मरीज की जान बचाना है। हायर सेंटर तक मरीज सुरक्षित पहुंचे, इसके लिए लॉजिस्टिक्स (वाहनों की उपलब्धता) सुनिश्चित करना भी अस्पताल प्रशासन का ही काम है।
### 2. दवाओं की बर्बादी या किसी बड़े घोटाले की बू
* *संदिग्ध गतिविधि:* 9 बोरी नॉर्मल सलाइन (NS) की बोतलें सड़क किनारे फेंकना और फिर रातों-रात उन्हें गायब कर देना सामान्य लापरवाही नहीं हो सकती। यह साफ तौर पर *रिकॉर्ड्स में हेरफेर करने या एक्सपायर्ड/अवैध स्टॉक को ठिकाने लगाने की कोशिश* लगती है।
* *मरीजों का शोषण:* एक तरफ सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को पर्चा थमाकर बाहर से दवाइयां और ड्रिप खरीदने पर मजबूर किया जाता है, और दूसरी तरफ सरकारी खजाने से आई जीवनरक्षक दवाओं को इस तरह कचरे में फेंका जा रहा है। यह सीधे तौर पर जनता के पैसों का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
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### सख्त कदम जो तुरंत उठाए जाने चाहिए (आपकी सुझाई गई कार्रवाई के आधार पर):
* *लॉगबुक और जीपीएस की जांच:* जिला प्रशासन को तुरंत उन सभी 4 एम्बुलेंस और 8 जननी वाहनों की लॉगबुक (Logbook) और जीपीएस ट्रैकिंग डेटा की जांच करनी चाहिए, ताकि पता चल सके कि घटना के समय वे गाड़ियां कहां थीं।
* *फॉरेंसिक और बैच नंबर की जांच:* अगर ग्रामीणों या मीडिया के पास फेंकी गई बोतलों की तस्वीरें या वीडियो हैं, तो उन बोतलों पर लिखे *’Batch Number’ और ‘Manufacturing/Expiry Date’* से यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि यह स्टॉक किस सरकारी स्टोर या किस अस्पताल को अलॉट किया गया था।
* *सीसीटीवी और अज्ञात वाहन की पहचान:* स्वास्थ्य विभाग और पुलिस को मिलकर उस क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज खंगालने चाहिए ताकि दवाओं को फेंकने वाले वाहन और उसमें शामिल कर्मचारियों की पहचान कर उन पर *आपराधिक मामला (Criminal Negligence and Misappropriation of Government Property)* दर्ज किया जा सके।
*निष्कर्ष:*
जब तक इस तरह के मामलों में *CMHO (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी)* और दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ ‘सख्त और मिसाली’ कार्रवाई नहीं होगी, तब तक कागजी दावे और जमीनी हकीकत का यह खौफनाक अंतर कभी खत्म नहीं होगा। ऐसे मामलों को दबाने के बजाय इनका पूरी तरह से पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है।
