विश्व पर्यावरण दिवस पर जरारूधाम से निकला हरित क्रांति का संदेश

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विश्व पर्यावरण दिवस पर जरारूधाम से निकला हरित क्रांति का संदेश

“प्रकृति का संरक्षण ही मानवता का संरक्षण है”- पुष्पलता सिंह पटेल
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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 05 जून को दमोह जिले के प्रसिद्ध गौ-अभयारण्य जरारूधाम, मगरोन में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और हरित भविष्य के संकल्प को समर्पित एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। नर्मदाखण्ड सेवा संस्थान एवं आशियाना संस्कार समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल पौधारोपण के माध्यम से प्रकृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का सशक्त संदेश भी दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रकृति वंदन और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ हुई। इसके बाद परिसर में अमरूद, आंवला एवं आम जैसे फलदार और उपयोगी प्रजातियों के लगभग 50 पौधों का रोपण किया गया। पौधारोपण के दौरान उपस्थित अतिथियों और समाजसेवियों ने पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण का भी संकल्प लिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पुष्पलता सिंह पटेल ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज संपूर्ण विश्व जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण, घटते वन क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में प्रत्येक व्यक्ति का यह नैतिक दायित्व बनता है कि वह पर्यावरण की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाए।
उन्होंने कहा कि वृक्ष केवल हरियाली का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि जीवन का आधार हैं। वृक्ष हमें प्राणवायु प्रदान करते हैं, वर्षा चक्र को संतुलित रखते हैं, भूजल स्तर को संरक्षित करते हैं तथा पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि आज हम वृक्षों को बचाने और नए पौधे लगाने के प्रति गंभीर नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियों को इसका भारी मूल्य चुकाना पड़ सकता है।
श्रीमति पटेल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं या औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे जन आंदोलन का स्वरूप देना होगा। प्रत्येक परिवार यदि वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे तो देश में हरित क्रांति का नया अध्याय लिखा जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं और समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य करें।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को माता का स्थान दिया गया है। हमारे धर्मग्रंथों और परंपराओं में वृक्षों, नदियों, पर्वतों और जीव-जंतुओं के संरक्षण की भावना सदैव विद्यमान रही है। आधुनिक विकास की दौड़ में यदि प्रकृति के साथ संतुलन नहीं बनाया गया तो विकास का यह मॉडल मानव सभ्यता के लिए संकट बन सकता है।
कार्यक्रम के दौरान नरेन्द्र बजाज ने कहा कि गौ-अभयारण्य केवल गौसेवा का केंद्र नहीं बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और जीव संरक्षण का भी महत्वपूर्ण स्थल है। यहां नियमित रूप से पौधारोपण, जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने घर, खेत, विद्यालय, संस्थान और सार्वजनिक स्थलों पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी निभाएं।
सभी ने पौधारोपण कर हरित भविष्य निर्माण के संकल्प को मजबूत किया।
कार्यक्रम में यह भी संदेश दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं बल्कि निरंतर चलने वाली सामाजिक जिम्मेदारी है। पौधे लगाना जितना आवश्यक है, उससे कहीं अधिक आवश्यक उनका संरक्षण करना है। यदि लगाए गए पौधे वृक्ष बनते हैं, तभी पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता ही मानव सभ्यता के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है। जरारूधाम से निकला यह हरित संदेश न केवल दमोह जिले बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने, जल संरक्षण करने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए जन-जागरण अभियान चलाने का सामूहिक संकल्प लिया।
“जब तक धरती पर हरियाली रहेगी, तभी तक मानवता की खुशहाली रहेगी”- इसी संदेश के साथ विश्व पर्यावरण दिवस का यह आयोजन संपन्न हुआ।

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