अपनी मांगे मनाने के लिए किसानों ने भोपाल सरकार का घेराव

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संसद की चौखट पर न्याय की आस, पर राह में खड़ी खाकी: भोपाल जा रहे अन्नदाताओं को रोकने बिछाईं कटीली तारें, पर महिला पुलिस बल के सामने जब किसानों ने जोड़े हाथ, तो रो पड़ी दुनिया !


विशेष संवाददाता,
गाडरवारा (नरसिंहपुर)अपनी जायज मांगों और 100% मूंग खरीदी के अधिकार को लेकर पिछले कई महीनों से भीषण धूप और मूसलाधार बरसात में संघर्ष कर रहा नरसिंहपुर गाडरवारा सहित मध्यप्रदेश भर का अन्नदाता जब न्याय की गुहार लगाने सूबे की राजधानी भोपाल की ओर बढ़ा, तो सरकार और सिस्टम ने उनका स्वागत फूलों से नहीं, बल्कि कँटीले तारों और भारी बैरिकेडिंग से किया। किसानों के आक्रोश को दबाने और उनके कदमों को रोकने के लिए जगह-जगह भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई। यहाँ तक कि रणनीति के तहत किसानों के ठीक सामने महिला पुलिस बल को ढाल बनाकर खड़ा कर दिया गया। सरकार को लगा होगा कि इस चक्रव्यूह में फंसकर किसान हिंसक हो जाएंगे, लेकिन बीच सड़क पर जो मर्मस्पर्शी और ऐतिहासिक तस्वीर सामने आई, उसने क्रूर शासकों के अहंकार को घुटनों पर ला दिया और देखने वालों की आंखें नम कर दीं।

👉आक्रोश के सैलाब में भी नहीं भूले संस्कार, महिला पुलिस बल को माना माँ-बेटी

लगातार मिल रही उपेक्षा और अपनी भीगती फसलों को देखकर किसानों के भीतर आक्रोश का ज्वालामुखी सुलग रहा था। लेकिन जैसे ही भोपाल की सीमा पर उनका सामना मुस्तैद महिला पुलिस बल से हुआ, किसानों का सारा गुस्सा पल भर में श्रद्धा और संस्कारों में तब्दील हो गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि फटेहाल और परेशान किसानों ने कँटीली तारों के सामने ही अपनी लाठियां जमीन पर रख दीं और भारी सुरक्षा गियर पहने खड़ी महिला पुलिसकर्मियों के सामने अपने दोनों हाथ जोड़ लिए। इतना ही नहीं, कई बुजुर्ग और युवा किसानों ने घुटनों के बल बैठकर उन महिला पुलिसकर्मियों के पैर छुए और भावुक होकर रो पड़े।

👉वर्दी के पीछे छिपी ममता भी पिघली, जनता बोली—यही है असली हिंदुस्तान

किसानों ने साफ संदेश दे दिया कि सरकार भले ही उनके साथ अपराधियों जैसा सुलूक करे, लेकिन वे वर्दी में खड़ी उन महिलाओं को पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि अपने ही घर की माँ, बहन और बेटी मानते हैं। किसानों का यह निश्छल और पवित्र व्यवहार देखकर वहां ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों का दिल भी पसीज गया और उनके चेहरों की सख्ती गायब हो गई। यह दृश्य गवाह है कि जो अन्नदाता देश का पेट भरने के लिए दिन-रात खेतों में पसीना बहाता है, उसके रग-रग में कितने ऊंचे संस्कार बसे हैं। परेशानी और घोर आर्थिक तंगी के इस दौर में भी किसानों ने अपनी मर्यादा और संस्कृति का जो परिचय दिया है, उसने साबित कर दिया कि देश में माँ-बेटी का सच्चा सम्मान सिर्फ इस देश का असली किसान ही कर सकता है।’

👉आपकी आवाज़’ का सत्ता से सीधा सवाल—कब तक लड़ेंगे अपने ही लोग ?

इस झकझोर देने वाली तस्वीर ने पूरी सरकार और प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ वो लाचार किसान हैं जो अपने बच्चों के भविष्य और फसल की सही कीमत के लिए सड़कों पर रो रहे हैं, और दूसरी तरफ वो पुलिसकर्मी हैं जो अपने पेट के लिए हुक्म की तामीर कर रहे हैं। ‘आपकी आवाज़’ चैनल भोपाल में बैठे हुक्मरानों से सीधा सवाल पूछता है कि अपनी ही जनता और अन्नदाताओं के सामने इस तरह की घेराबंदी करके आप क्या साबित करना चाहते हैं? जब किसान पैर छूकर अपनी व्यथा सुना रहा है, तो आपकी बंद हो चुकी अंतरात्मा कब जागेगी?#KisanAndolan2026 #FarmersRespectWomen #ApkiAwaaz #NarsinghpurNews #BhopalKisanProtest

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