हाईकोर्ट जज को फोन करना पड़ा भारी, विधायक संजय पाठक पर अवमानना केस. जबलपुर हाईकोर्ट ने भाजपा विधायक संजय पाठक के एक मामले में याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को क्रिमिनल कंटेम्ट चलाने का आदेश दे दिया। कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने यह आदेश दिए।
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हाईकोर्ट जज को फोन करना पड़ा भारी, विधायक संजय पाठक पर अवमानना केस
MLA contacted judge controversy: जबलपुर हाईकोर्ट ने भाजपा विधायक संजय पाठक के एक मामले में याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को क्रिमिनल कंटेम्ट चलाने का आदेश दे दिया। कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने यह आदेश दिए।
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Apr 02, 2026
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हाईकोर्ट जज को फोन करना पड़ा भारी, विधायक संजय पाठक पर अवमानना केस। (फोटो सोशल मीडिया)
BJP MLA Sanjay Pathak contempt of court case: अवैध उत्खनन से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रहे हाईकोर्ट जज से सीधे संपर्क करने के आरोप में भाजपा विधायक एवं पूर्व राज्य मंत्री संजय पाठक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना का प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए।
जबलपुर हाईकोर्ट ने भाजपा विधायक संजय पाठक के एक मामले में याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को क्रिमिनल कंटेम्ट चलाने का आदेश दे दिया। कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने यह आदेश दिए। संजय पाठक कटनी जिले की विजयराघोगढ़ विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक हैं।
आशुतोष मनु दीक्षित की याचिका के मुताबिक 1 सितंबर 2025 को न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। उन्होंने अपने आदेश में इसका उल्लेख किया था कि विधायक संजय पाठक की ओर से उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, जिससे न्यायिक निष्पक्षता प्रभावित हो सकती थी। इस कारण उन्होंने उक्त प्रकरण की सुनवाई से स्वयं को अलग करते हुए पूरे मामले को प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दे दिए थे।न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंची’
याचिकाकर्ता आशुतोष मनु दीक्षित ने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि इस मामले को लेकर पहले संबंधित अधिकारियों को भी शिकायत की गई थी, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। फलस्वरूप याचिका दायर करनी पड़ी। याचिकाकर्ता के अनुसार उक्त कृत्य न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। इसके बाद विधायक संजय पाठक की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज करने की मांग की गई, लेकिन खंडपीठ ने इसे स्वीकार नहीं किया और अवमानना प्रकरण दर्ज करने के निर्देश जारी कर दिए। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव और पुनीत श्रोती ने पैरवी की थी।विधायक परिवार की फर्मों पर वसूली का दबाव
लम्बे समय से 443 करोड़ रुपए की राशि जमा करने में आनाकानी करने वाले विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक की मुसीबत अब और बढ़ सकती है। उनके परिवार से जुड़ी फर्मों को पहले नोटिस जारी किया गया था। लेकिन, कोई जवाब नहीं मिला और न ही जमा नहीं की गई। छह महीने पुराने इस प्रकरण में जबलपुर कलेक्टर न्यायालय ने इन फर्मों को अंतिम अवसर देने के लिए समय समाप्ति नोटिस जारी किया है। इस प्रकरण में तीन फर्मों को नोटिस भेजा गया है। इनमें विधायक पाठक के परिवार से जुड़ी दो फर्म निर्मला मिनरल्स और आनंद माइनिंग कारपोरेशन शामिल हैं। तीसरी फर्म पेसिफिक एक्सपोर्टर्स हैं, जिसके संचालक सुमित अग्रवाल हैं। इनकी खदान सिहोरा के ग्राम रीठी में संचालित है। विधायक पाठक के परिवार की दोनों फर्म सिहोरा में प्रतापपुर, टिकरिया और दुबियारा में खनन करती हैं। जांच में पाया गया कि इन फर्मों ने स्वीकृत मात्रा से 84 लाख 57 हजार 640 टन अतिरिक्त आयरन ओर का खनन किया था। इसकी कुल वसूली योग्य राशि 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार रुपए है।
