“जल गंगा संवर्धन अभियान”
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सरकार महिला, युवा, गरीब और किसानों सहित सभी वर्गों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है- राज्यमंत्री श्री पटेल
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रजवांस ग्राम पंचायत में 25 लाख रूपये की लागत से सामुदायिक भवन का लोकार्पण एवं ग्राम घोघरी में 15 लाख की लागत से बनेगा सामुदायिक भवन हुआ भूमीपूजन
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जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण का हुआ शुभारंभ

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जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी मंत्री अपने-अपने जिलों में जाकर इसकी शुरुआत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांवेर विधानसभा में इसका शुभारंभ किया। इस तीसरे चरण में पिछले चरणों में अधूरे रह गए कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र सहित प्रदेशभर में पुराने जल स्रोतों का संरक्षण और संवर्धन करना है। इसमें पुरानी बावड़ियों, कुओं और अन्य जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करने का कार्य प्राथमिकता से किया जाएगा। इस आशय के विचार पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री लखन पटेल ने ग्राम रजवांस में 25 लाख रूपये की लागत से नव-निर्मित सामुदायिक भवन के लोकार्पण एवं इसी पंचायत के ग्राम में घोघरी में 15 लाख रूपये की लागत से सामुदायिक भवन के निर्माण हेतु भूमि पूजन और जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत् तालाब की मेंड़ पर कुदाल चलाकर आयोजित गरियामय समारोह को संबोधित कर रहे थे।
राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा प्रदेश में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तीसरे चरण की शुरुआत हुई, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेशभर में प्रारंभ किया गया है। राज्यमंत्री लखन पटेल ने कहा कई ग्रामों में बने तालाब जर्जर हो चुके हैं या संसाधनों के अभाव में अधूरे हैं। इस अभियान के माध्यम से ऐसे तालाबों का सुधार एवं पुनर्निर्माण किया जाएगा। उन्होने कहा, इस अवसर पर ग्राम घोघरी में लगभग 15 लाख रुपए की लागत से सामुदायिक भवन के निर्माण हेतु भूमि पूजन भी किया गया। यह पंचायत शहर से जुड़ी हुई है, जिससे भविष्य में स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा इस वर्ष को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ घोषित किया गया है, जो गुड़ी पड़वा से प्रारंभ होकर अगले वर्ष तक चलेगा। इस दौरान किसानों के कल्याण हेतु विभिन्न योजनाएं संचालित की जाएंगी।
उन्होने बताया कि सरकार द्वारा मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए केज प्रणाली लागू की जा रही है। एक केज की लागत लगभग 1 से 1.5 लाख रुपए होती है, जबकि कुल प्रारंभिक खर्च लगभग 2.5 लाख रुपए तक आता है, एक केज में लगभग 3 टन मछली उत्पादन संभव है, जिससे पहले वर्ष में ही करीब 3 लाख रुपए तक की आय प्राप्त की जा सकती है। यह उत्पादन लगभग 15 वर्षों तक जारी रह सकता है।
राज्यमंत्री श्री पटेल ने बताया किसान समूह बनाकर एक से चार केज स्थापित कर सकते हैं और सामूहिक रूप से इस कार्य को आगे बढ़ा सकते हैं। तालाबों एवं नदियों के स्थिर जल क्षेत्रों में यह योजना विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी। उन्होने कहा सरकार महिला, युवा, गरीब और किसानों सहित सभी वर्गों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है। अंत में उन्होंने सभी प्रदेशवासियों और क्षेत्रवासियों को गुड़ी पड़वा एवं नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

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जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि गौरव पटेल ने संबोधित करते हुए शासन के जल गंगा संवर्धन अभियान की जानकारी दी। इसी क्रम में सीईओ के.के पांडे ने इस अभियान की विस्तार से जानकारी दी उन्होंने कहा 25 लाख रुपए की लागत से बने सामुदायिक भवन का लोकार्पण एवं 15 लाख की लागत से बनने वाले सामुदायिक भवन का भूमि पूजन किया गया है।
