उनके दरबार में हर प्रार्थना केवल सुनी नहीं जाती, बल्कि श्रद्धा और विश्वास के साथ स्वीकार भी होती है।
“राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं, रामनाम वरानने॥”
जब श्रीराम का नाम स्वयं हजार नामों के जप के समान फलदायी है, तब उस नाम के अनन्य उपासक पवनपुत्र हनुमान की शरण कितनी कल्याणकारी होगी, इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है।
विश्वास रखिए…
जहाँ राम का नाम है, वहाँ हनुमान जी का आशीर्वाद है, और जहाँ हनुमान जी की कृपा है, वहाँ असंभव भी संभव बन जाता है।
॥ जय श्री राम ॥
॥ जय डॉक्टर हनुमान ॥
