इंदौर में भीषण गर्मी के बीच जल संकट गहरा गया है। पानी की किल्लत से परेशान जनता का गुस्सा रविवार को सड़कों पर फूट पड़ा। शहर के अलग-अलग चौराहों पर कांग्रेस पार्षदों के नेतृत्व में रहवासियों ने उग्र प्रदर्शन और चक्काजाम किया।
इसके कारण शहर की रफ्तार थम गई और तपती धूप में सैकड़ों यात्री कई घंटों तक सिटी बसों और अन्य वाहनों में फंसे रहे। आखिरकार नगर निगम, पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के कार्रवाई के आश्वासन के बाद प्रदर्शन को समाप्त कर दिया गया।
चक्काजाम से यात्रियों की बढ़ी आफत
सुबह से ही शहर के दो बड़े केंद्रों पर प्रदर्शनकारियों ने मोर्चा खोल दिया। पालदा चौराहे पर कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी के नेतृत्व में वार्ड-75 और वार्ड-64 के सैकड़ों रहवासी सड़क पर बैठ गए।
दीनदयाल उपाध्याय चौराहे (सुखलिया जोन-5) पर वार्ड-27 के पार्षद राजू भदौरिया के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। दोनों ही प्रमुख मार्गों पर चक्काजाम होने से वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सबसे ज्यादा परेशानी सिटी बसों में सफर कर रहे आम यात्रियों, बुजुर्गों और बच्चों को हुई, जो घंटों जाम में फंसे रहे।
वार्ड-27 में प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पहले जो निःशुल्क पानी वितरण की व्यवस्था थी, वह बंद कर दी गई है, जिससे संकट और बढ़ गया है। महापौर के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
22 जोनल कार्यालयों पर पानी का संकट
इससे पहले भी कांग्रेस शहर के सभी 22 जोनल कार्यालयों पर पानी संकट को लेकर प्रदर्शन कर चुकी है। कई इलाकों में लोग सड़क पर उतरकर चक्काजाम और धरना दे चुके हैं।
हाल ही में बड़ी संख्या में लोग पानी दो-पानी दो के नारे लगाते हुए पैदल विधायक रमेश मेंदोला के निवास तक पहुंच गए थे।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं और पुरुषों ने खाली बर्तन लेकर नगर निगम प्रशासन और महापौर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सुखलिया में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पहले जो निःशुल्क पानी वितरण व्यवस्था’ चल रही थी, उसे नगर निगम ने बंद कर दिया है। इसके कारण गरीब बस्तियों और मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने पानी का संकट और ज्यादा गंभीर हो गया है।
इंदौर में पानी संकट के 3 मुख्य कारण
पार्षद कुणाल सोलंकी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, शहर में पानी की किल्लत के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़ी वजहें हैं।
- नर्मदा लाइन का न होना: वार्ड-75 और आसपास की कई नई कॉलोनियों व मोहल्लों में अब तक नगर निगम द्वारा नर्मदा जल की पाइपलाइन नहीं बिछाई जा सकी है।
- टैंकरों की भारी कमी: जिन इलाकों में पाइपलाइन नहीं हैं, वहां लोग पूरी तरह निगम के टैंकरों के भरोसे हैं, लेकिन नगर निगम से पर्याप्त संख्या में टैंकर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे नियमित सप्लाई ठप है।
- ग्राउंड वॉटर लेवल गिरना: भीषण गर्मी के कारण बोरिंग सूख चुके हैं, जिससे टैंकरों के अलावा पानी का कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
प्रशासन का आश्वासन और विपक्ष का अल्टीमेटम
घंटों चले हंगामे के बाद नगर निगम के अधिकारी और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि प्रभावित वार्डों में तुरंत अतिरिक्त टैंकरों की व्यवस्था की जाएगी और पानी की सप्लाई सुचारु करने के लिए स्थायी कदम उठाए जाएंगे।
कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि प्रशासन के आश्वासन पर फिलहाल चक्काजाम खोला गया है, अगर अगले कुछ दिनों में टैंकरों की संख्या नहीं बढ़ी और जल संकट का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो पूरी कांग्रेस पार्टी रहवासियों के साथ मिलकर शहरव्यापी उग्र आंदोलन करेगी।
