ओरछा में हवाई ‘उड़ान’…4.30 घंटे में दर्शन कर भोपाल लौटें:500 फीट की ऊंचाई पर जॉय राइड भी; हेलिकॉप्टर से 1.10 घंटे में पहुंचें चंदेरी

[metaslider id="122"]

मध्य प्रदेश के ओरछा में राजा राम के दरबार में अब आप सिर्फ डेढ़ घंटे में ही पहुंच सकते हैं। हेली पर्यटन सेवा के जरिए भोपाल से ओरछा के लिए हेलिकॉप्टर सेवा शुरू की गई है। हर रोज सुबह 9.30 बजे हेलिकॉप्टर ओरछा के लिए उड़ान भरता है और दोपहर 2 बजे वापस लौट आता है। यानी, सिर्फ साढ़े 4 घंटे में राजा राम के दर्शन कर भोपाल लौटा जा सकता है। चंदेरी में जॉय राइड करके उसे निहार भी सकते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 19 अप्रैल से ओरछा और चंदेरी के लिए हेलिकॉप्टर सेवा शुरू की है। दोनों टूरिस्ट और धार्मिक स्पॉट को लोग 3 हजार फीट की ऊंचाई से देख सकते हैं। वहीं, 500 फीट की ऊंचाई पर जॉय राइड भी कर सकते हैं।

भास्कर ने इतनी ऊंचाई से दोनों शहरों को कैमरे में कैद किया। ओरछा में राजा राम का दरबार हो या चंदेरी की इमारतों का हजारों साल पुराना इतिहास, ऊंचाई से लोग हेलिकॉप्टर से उन्हें निहारने के लिए राइड भी कर रहे हैं। पिछले 2 दिन में कई लोग राइड कर चुके हैं। आम तौर पर हेलिकाप्टर जमीन से 10 से 15 हजार फीट तक उड़ता है। जिस समय यह ओरछा और चंदेरी पहुंचता है तो उसकी ऊंचाई 3 से 5 हजार फीट तक रहती है। इसके बाद वह धीरे-धीरे हेलीपेड पर लैंड करता है।

ओरछा, बुंदेलखंड की अयोध्या मानी जाती है। यहां दीवार पर दोहा लिखा है– रामराजा सरकार के दो निवास हैं, ‘खास दिवस ओरछा रहते हैं, शयन अयोध्या वास’। यानी भगवान राम दिन में राजा के रूप में रहते हैं। शयन के लिए रोजाना अयोध्या जाते हैं। इसका भी प्रोटोकॉल होता है। उन्हें बकायदा गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जाता है।

दिवाली पर श्री रामराजा दरबार को रोशनी और फूलों से सजाया जाता है। दीपोत्सव के दूसरे दिन राजराजा सरकार के दरबार में आसपास के गांवों की टोलियां मौनिया नृत्य करती हैं। नृत्य के लिए बुंदेलखंड के पन्ना, छतरपुर, दमोह समेत उत्तर प्रदेश के झांसी, राठ, हमीरपुर, बांदा से मौनियों की टोलियां आती हैं। टोलियों में अंग्रेज टूरिस्ट भी शामिल होते हैं।

अशोकनगर जिले का एक छोटा सा शहर चंदेरी है। चंदेरी साड़ी, यहां के इतिहास के साथ अब चंदेरी फिल्म शूटिंग से भी पहचाना जाने लगा है। स्त्री जैसी बड़े स्टॉरकास्ट वाली फिल्मों की शूटिंग भी यहीं पर हुई है।

पर्यटन नगरी चंदेरी का राजा मेदनी राय एवं रानी मणिमाला के किस्सों से जुड़ा हुआ है। यह किला अपने अंदर महाभारत के किस्सों के इतिहास को भी समेटे हुए हैं। महाभारत काल के दौरान चंदेरी नगरी को राजा शिशुपाल की नगरी के नाम से जाना जाता था।

कई राजा रहे अंतिम समय में वहां पर राजा मेदनी राय एवं रानी मणिमाला अपनी यादें छोड़ गए हैं। बैजू बावरा भी चंदेरी नगरी से तालुक रखते हैं। पिछले कुछ साल से यहां पर पर्यटकों की भीड़ बढ़ गई हैं। यही वजह है कि सरकार ने इसे पर्यटन हेली सेवा से भी जोड़ा है।

[metaslider id="122"]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights