*चिलचिलाती धूप में भी नहीं झुकी आस्था: गौ-रक्षा के लिए उमड़ा जनसैलाब, 22 हजार हस्ताक्षरों से गूंजी हुंकार*
*गंजबासौदा।* सूरज सिर पर था, सड़कों पर तपिश थी, लेकिन जनभावना उससे कहीं अधिक प्रखर। सोमवार को गौ माता के सम्मान, सुरक्षा और राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग को लेकर शहर मानो एक स्वर में सड़कों पर उतर आया हो। सड़कें धूप से तप रही थीं, कंठ सूख रहे थे लेकिन गौ माता के लिए उठी आवाज और बुलंद होती जा रही थी। न कदम रुके, न स्वर थमा। हर ओर एक ही हुंकार गूंज रही थी, “गौ हत्या बंद हो”, “बूचड़खाने बंद हो”, “गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करो।” यह संकल्प था उन हजारों गौ-भक्तों का, जो संतों के सान्निध्य में कदम से कदम मिलाते हुए गौ सेवा अभियान के लिए शुरू हुए पहले चरण के आंदोलन में शामिल होने के लिए सड़कों पर उतरे। संकीर्तन के साथ सुबह 11 बजे नौलखी मंदिर से श्रीराम नाम संकीर्तन के साथ यात्रा शुरू हुई। जैसे-जैसे जुलूस नेहरू चौक और अंबेडकर चौक से आगे बढ़ा, वैसे-वैसे यह जनसैलाब में बदलता गया। हाथों में तख्तियां, होठों पर नारे और पूरा शहर गौ-भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। जुलूस का जगह-जगह पुष्प वर्षा और शीतल जल सेवा से यात्रा का स्वागत हुआ। हजारों गौ-भक्त, संत और नागरिक शांतिपूर्ण ढंग से पैदल चलते हुए तहसील कार्यालय पहुंचे, जहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन और हस्ताक्षर की पोटलियां एसडीएम अनुभा जैन को सौंपी गई। जुलूस में किन्नर समाज सहित सभी वर्गों की भागीदारी देखी गई।
*संतों के सिर पर 22 हजार हस्ताक्षरों का संकल्प, हाथों में जनभावना*
जुलूस का दृश्य अपने आप में को भक्ति का अलग ही संदेश दे रहा था। पीले वस्त्र में बंधी 22 हजार हस्ताक्षरों की पोटलियां संतों के सिर पर थीं, और हाथों में “गाय को राष्ट्र माता घोषित करो”, “गौ हत्या बंद करो” जैसे संदेश लिखी तख्तियां। गौ सेवा अभियान के अंतर्गत नगर में चलाए गए हस्ताक्षर अभियान में एकत्रित हुए 22 हजार हस्ताक्षरों वाली पीले कपड़े की पोटलियों को वेदांत आश्रम के महंत एवं गौ सेवा अभियान के तहसील प्रचारक हरिहरदास जी महाराज, गंज हनुमान मंदिर के महंत महेश्वरदास त्यागी जी, महामंडलेश्वर रामप्रिय दास सहित अन्य संत अपने सिर पर रखकर जुलूस में आगे आगे चल रहे थे। गौ माता के भजन चलते हुए दो गौ रथ के अलावा ग्राम तिलातिली कल्लाखेड़ी, मेवली और शाहपुर की भजन मंडली भी जुलूस में शामिल थी। पीले कपड़े में बंधी इन पोटलियों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री,राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम अंकित थे। संतों ने जब 22 हजार हस्ताक्षरों की पोटलियां अपने सिर पर रखीं, तो वह दृश्य पूरे आंदोलन का सबसे प्रभावशाली प्रतीक बन गया जिसे संत स्वयं आगे बढ़ाकर शासन तक ले जा रहे थे। जुलूस में सबसे आगे वेदांत आश्रम के नन्हे बटुक, उनके पीछे संतों की कतार और फिर हजारों गौ-प्रेमी यह अनुशासित श्रृंखला में तहसील कार्यालय तक पैदल पहुंचे।
*तपती धूप में भी पिंड भरते कदमों ने दिखाई गौ भक्ति*
गौ माता के सम्मान हेतु आयोजित कार्यक्रम में आस्था का एक विरल और भावपूर्ण दृश्य उभरकर सामने आया। काली माता मंदिर, बूढ़ापुरा से गौ रक्षा मंच के जिला अध्यक्ष विशाल वैष्णव पिंड भरते हुए (दंडवत) तहसील ग्राउंड तक पहुंचे। तपती धरती, झुलसाती धूप और बिना किसी थकान के उनके इस आध्यात्मिक संकल्प ने पूरे जुलूस को एक अलग ही भावभूमि प्रदान की। इस अवसर पर महामंडलेश्वर रामप्रिय दास महाराज, रामानुज शास्त्री (अयोध्या), शंभू कृष्णानंद महाराज सहित अनेक संतों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।
*जुलूस में किन्नर समाज सहित सभी वर्गों की रही भागीदारी*
जुलूस के दौरान आंदोलन में धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक और व्यापारिक संगठनों के साथ किन्नर समाज की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। प्रमुख रूप से मुरादपुर हनुमान मंदिर के महंत, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती शशि अनिल यादव, पूर्व विधायक निशंक जैन, नेता प्रतिपक्ष जगदीश व्यास,व्यापार महासंघ अध्यक्ष विपिन तिवारी, भाजपा की प्रदेश कार्य समिति सदस्य राजेश तिवारी, विधायक प्रतिनिधि संजय रघुवंशी, (हरिपुर), देवेंद्र वर्मा, निस्वार्थ गौ सेवा समिति के संस्थापक लालू महाराज, सुरेश तनवानी विजय अरोड़ा, गौ सेवा अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं के अलावा विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और हजारों संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
गौ माता के सम्मान में संतों के साथ सड़कों पर उतारे गौ भक्त 22हजार हस्ताक्षर सौपें
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