आस्था का संगम: लटेरी में 22 वर्षों से अनवरत जारी है भगवान परशुराम जन्मोत्सव की भव्य परंपरा

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जिला ब्यूरो राजेंद्र विश्वकर्मा

लटेरी | धर्म और संस्कृति की धरा लटेरी में भगवान विष्णु के छठे अवतार, अक्षय प्रतापी भगवान श्री परशुराम जी का जन्मोत्सव अत्यंत हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। स्थानीय ‘आश्रम श्री हनुमान मंदिर’ (तालाब परिसर) में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने एक बार फिर 22 वर्षों से चली आ रही जीवंत परंपरा की चमक बिखेरी।
वेदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान हुआ परिसर
कार्यक्रम का शुभारंभ आश्रम प्रमुख धर्माधिकारी श्री अशोक भार्गव के पावन सान्निध्य में हुआ। वैदिक रीति-रिवाजों के साथ भगवान परशुराम जी का विधि-विधान से पूजन और हवन संपन्न कराया गया। यज्ञ की आहुतियों और गूंजते मंत्रों के बीच समूचा वातावरण भक्तिमय हो उठा, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।
धर्म और न्याय के प्रतीक हैं परशुराम जी
इस अवसर पर आचार्य पं. गौरव भार्गव ने भगवान परशुराम जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा:
“भगवान परशुराम केवल शस्त्र के नहीं, बल्कि शास्त्र और न्याय के भी रक्षक हैं। वे साहस और धर्म के वह प्रतीक हैं, जिनके बताए मार्ग पर चलकर ही समाज में सत्य की स्थापना संभव है।”
प्रमुख जनों की गरिमामयी उपस्थिति
इस धार्मिक अनुष्ठान में ब्राह्मण समाज के अनेक गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता कर आयोजन को सफल बनाया। उपस्थिति में मुख्य रूप से शामिल रहे:
श्री राजनारायण पराशर, श्री विष्णु गुरु, श्री रमेश शर्मा
श्री शिवओम दुबे, श्री रामेश्वर शर्मा, श्री ऋषि द्विवेदी
श्री सचिन शर्मा, श्री राजेश शर्मा, श्री अजय भंडारी, श्री वैभव शर्मा
प्रसादी और सामाजिक एकता का संदेश
हवन-पूजन की पूर्णाहुति के पश्चात विशाल प्रसादी का वितरण किया गया। बड़ी संख्या में नगरवासियों ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ लिया। यह आयोजन न केवल व्यक्तिगत आस्था का केंद्र रहा, बल्कि इसने सामाजिक समरसता और एकजुटता का एक सुंदर उदाहरण भी पेश किया।
एक नजर में आयोजन:
स्थान: आश्रम श्री हनुमान मंदिर (तालाब परिसर), लटेरी।
विशेषता: पिछले 22 वर्षों से निरंतर आयोजन।
मुख्य आकर्षण: भव्य हवन-पूजन एवं प्रसादी वितरण।
संदेश: परंपराओं का संरक्षण और युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ना।
निष्कर्ष: लटेरी में प्रतिवर्ष होने वाला यह आयोजन अब केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। जो यह दर्शाता है कि आधुनिकता के दौर में भी यहाँ की जड़ें अपनी समृद्ध विरासत से मजबूती से जुड़ी हुई हैं।

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