बुजुर्गों की आँखों के आँसू पोंछ रही ‘पुलिस पंचायत’: विदिशा में पारिवारिक विवादों का हुआ मौके पर निपटारा

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चाणक्य न्यूज़ इंडिया
जिला ब्यूरो राजेंद्र विश्वकर्मा

विदिशा: समाज में बिखरते रिश्तों और अपनों से प्रताड़ित बुजुर्गों के लिए विदिशा पुलिस की ‘पुलिस पंचायत’ एक उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी के निर्देशन में आयोजित साप्ताहिक बैठक में कई गंभीर पारिवारिक और संपत्ति विवादों की सुनवाई की गई, जहाँ मौके पर ही समझाइश और ठोस कार्रवाई के जरिए बुजुर्गों को न्याय दिलाया गया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे एवं कोर कमेटी के सदस्यों की उपस्थिति में संपन्न हुई इस बैठक में मानवीय संवेदनाओं और कानून के समन्वय का अनूठा स्वरूप देखने को मिला।
प्रमुख मामले: जब अपनों ने ही दिया दर्द
बैठक में मुख्य रूप से चार बड़े प्रकरणों पर गहनता से चर्चा और समाधान की राह निकाली गई:
1. मुआवजे की राशि और बेटी का विवाद (देहात क्षेत्र)
एक बुजुर्ग पिता ने अपनी बेटी पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था। विवाद की जड़ जमीन के मुआवजे की राशि थी। पुलिस पंचायत ने जब बैंक स्टेटमेंट और जॉइंट अकाउंट की बारीकी से जांच की, तो तथ्यों के आधार पर पिता ने स्वीकार किया कि राशि का उपयोग उनके द्वारा ही किया गया था। कमेटी की समझाइश के बाद पिता-पुत्री के बीच का मनमुटाव खत्म हुआ और दोनों पक्ष भविष्य में सौहार्द बनाए रखने पर राजी हुए।
2. पक्के कमरे के लिए तरसते 90 वर्षीय माता-पिता (गंजबासौदा)
हृदयविदारक मामले में एक बुजुर्ग दंपत्ति कच्चे मकान में रहने को मजबूर थे, जबकि उनका पुत्र पक्के कमरे पर काबिज था। पंचायत ने मध्यस्थता करते हुए सख्त निर्देश दिए कि पक्का कमरा बुजुर्गों के लिए खाली किया जाएगा और पुत्र को अलग प्लॉट पर निर्माण की जगह दी जाएगी। अगले 15 दिनों में बुजुर्गों के सम्मानजनक निवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।
3. दरवाजा तोड़ा, कमरे पर किया कब्जा (दीपना खेड़ा)
एक अत्यंत वृद्ध महिला ने गुहार लगाई कि उनके पुत्र ने न केवल कमरे पर कब्जा किया, बल्कि घर का दरवाजा भी तोड़ दिया। पुलिस पंचायत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पुलिस सहायता उपलब्ध कराई और आवेदिका को तुरंत राहत प्रदान करते हुए जांच शुरू की।
4. आपसी सुलह से खत्म हुआ वर्षों का तनाव (विदिशा शहर)
भाइयों और पुत्रवधुओं के बीच चल रहे झगड़े के एक मामले में पुलिस पंचायत की सक्रियता का असर यह हुआ कि सुनवाई से पहले ही पक्षों ने आपसी सुलह कर ली। बुजुर्ग आवेदक ने पुलिस प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
समाज के गिरते स्तर पर चिंता
बैठक के दौरान अधिकारियों और समिति सदस्यों ने बुजुर्गों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार पर गहरी चिंता व्यक्त की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे ने स्पष्ट किया कि पुलिस पंचायत का उद्देश्य केवल कानूनी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि बुजुर्गों को समाज और परिवार में उनका खोया हुआ सम्मान वापस दिलाना है।
“हमारा लक्ष्य है कि कोई भी बुजुर्ग अपनों के बीच खुद को असुरक्षित महसूस न करे। त्वरित न्याय और पारिवारिक सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।”
— पुलिस पंचायत कोर कमेटी
समिति के सदस्य रहे मौजूद
सुनवाई के दौरान पंचायत कोर कमेटी के सदस्य श्री आर. कुलश्रेष्ठ, श्री प्रमोद व्यास, श्री अतुल शाह, डॉ. सचिन गर्ग, श्री विनोद शाह, श्री अजय टंडन एवं श्री पार्थ पितलिया उपस्थित रहे, जिन्होंने मध्यस्थ के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निष्कर्ष: विदिशा पुलिस की यह पहल समाज के “स्याह स्वरूप” को बदलने की एक सार्थक कोशिश है, जहाँ कानून दंड देने के बजाय रिश्तों को जोड़ने का सेतु बन रहा है।

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