विदिशा: ‘सेटेलाइट’ की चूक और सिस्टम की मार, बदहाल हुआ अन्नदाता

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जिला ब्यूरो राजेंद्र विश्वकर्मा

मध्य प्रदेश में इस समय किसान दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ प्रकृति की अनिश्चितता है, तो दूसरी तरफ सरकारी तंत्र की तकनीकी खामियां। विदिशा तहसील के 6443 किसानों का भविष्य फिलहाल अधर में लटका है क्योंकि सरकारी “सेटेलाइट सर्वे” जमीनी हकीकत से कोसों दूर निकल गया है।
1. कागजों पर कुछ और, खेत में कुछ और
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि किसानों ने अपने खेतों में गेहूं, चना और मसूर की बुवाई की है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड और सेटेलाइट सर्वे में वहां ‘अन्य फसलें’ दर्ज दिखाई दे रही हैं।
परिणाम: सत्यापन (Verification) न होने के कारण हजारों लघु एवं सीमांत किसान सरकारी पंजीयन (Registration) प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं।
2. पंजीयन और स्लॉट बुकिंग का संकट
किसानों की परेशानी फसल दर्ज होने तक सीमित नहीं है:
खरीदी में देरी: सरकारी केंद्रों पर खरीदी पहले ही देरी से शुरू हुई है।
स्लॉट बुकिंग में गड़बड़ी: जब किसान अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट बुक करने की कोशिश कर रहे हैं, तो पोर्टल पर त्रुटियां और विसंगतियां सामने आ रही हैं।
3. आर्थिक चक्र टूटा, किसान परेशान
यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं है, बल्कि किसानों के सामाजिक और आर्थिक जीवन पर सीधा प्रहार है। किसान को अपनी उपज बेचकर:
बच्चों की स्कूल/कॉलेज की फीस भरनी है।
घर में शादी-ब्याह के खर्च निपटाने हैं।
बैंक और साहूकारों के कर्ज की किश्तें चुकानी हैं।
पंजीयन न होने से किसान की पूरी वित्तीय योजना चरमरा गई है।
प्रशासन और नेतृत्व पर उठते सवाल
“क्या यही है किसान हितैषी सरकार का कृषि कल्याण वर्ष?”
यह सवाल आज विदिशा का हर किसान पूछ रहा है। विदिशा न केवल एक जिला है, बल्कि देश के वर्तमान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संसदीय क्षेत्र भी है।
क्षेत्रीय उपेक्षा: जब कृषि मंत्री के अपने ही क्षेत्र में 6000 से अधिक किसानों का सर्वे फेल हो जाए, तो बाकी प्रदेश की स्थिति का अंदाजा लगाना कठिन नहीं है।
जवाबदेही: आखिर सेटेलाइट सर्वे और पटवारी सत्यापन के बीच इतना बड़ा अंतर कैसे आया? क्या डिजिटल इंडिया के नाम पर किसानों को उनके हक से वंचित किया जा रहा है?
निष्कर्ष: किसानों की इस दुर्दशा पर तत्काल संज्ञान लेने की आवश्यकता है। यदि समय रहते रिकॉर्ड में सुधार नहीं किया गया और स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया सरल नहीं की गई, तो यह ‘कृषि कल्याण वर्ष’ किसानों के लिए ‘आर्थिक आपदा का वर्ष’ बन जाएगा। सरकार को चाहिए कि वह केवल तकनीक पर निर्भर न रहकर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) को प्राथमिकता दे ताकि एक भी पात्र किसान पंजीयन से न छूटे।

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