संसद में दिग्विजय भावुक, बोले- न मैं टायर्ड, न रिटायर्ड; शिवराज को बतोलेबाज कहने पर टीचर सस्पेंड
विदाई भाषण में दिग्विजय सिंह का बड़ा संदेश राज्यसभा सांसद के रूप में दिग्विजय सिंह का कार्यकाल अब पूरा होने जा रहा है। इससे पहले संसद में उनका विदाई भाषण हुआ, जिसमें वे थोड़े भावुक नजर आए। हालांकि, अपने संबोधन में उन्होंने एक बड़ा संदेश भी दे दिया।
दिग्विजय सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की एक बात को याद करते हुए कहा कि वे न तो टायर्ड हैं और न ही रिटायर्ड। उन्होंने साफ किया कि आगे भी वे सक्रिय रहेंगे और काम करते रहेंगे।
दिग्विजय सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अपना रास्ता खुद तय किया है। कभी किसी से कटुता नहीं पाली। विचारधारा में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद होने का उन्होंने कभी मौका नहीं दिया।
अपने संबोधन के अंत में दिग्विजय सिंह ने कबीरदास की पंक्तियां सुनाईं- “कबीरा खड़ा बाजार में मांगे सबकी खैर, न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर।”
संदेश साफ है कि पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त। दिग्विजय सिंह अब मध्य प्रदेश की राजनीति में और ज्यादा सक्रिय नजर आ सकते हैं। बस यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी भूमिका क्या रहती है। वे फ्रंट फुट पर खेलते हैं या फिर बैकस्टेज की सियासत करते हैं।
नाम नहीं था, फिर भी कांग्रेस विधायक बोले हरदा में राजनीति का अलग ही रंग देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यहां पहुंचे तो एक ओर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध जताने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस विधायक डॉ. आरके दोगने मुख्यमंत्री के मंच पर नजर आए।
सियासी शिष्टाचार के तहत स्थानीय विधायक डॉ. आरके दोगने को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, लेकिन वक्ताओं की सूची में उनका नाम शामिल नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने मंच से बोलना शुरू कर दिया।
दरअसल, जैसे ही पूर्व मंत्री कमल पटेल का भाषण खत्म हुआ और जिले के प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग का नाम पुकारा गया, उससे पहले ही विधायक दोगने डायस पर पहुंच गए और संबोधित करने लगे।
उन्होंने हरदा आगमन पर मुख्यमंत्री का स्वागत किया और इसके साथ ही 2700 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदी समेत अन्य मांगें भी उनके सामने रख दीं। जब कलेक्टर ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा कि वे जनप्रतिनिधि हैं और मुख्यमंत्री का स्वागत कर रहे हैं, विरोध नहीं।
इस घटनाक्रम से कुछ देर के लिए माहौल जरूर असहज हो गया, लेकिन बाद में कार्यक्रम सामान्य हो गया। वहीं, जब मुख्यमंत्री के संबोधन की बारी आई, तो उन्होंने कांग्रेस विधायक की मौजूदगी में ही कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा।
शिवराज पर कमेंट भारी पड़ा, शिक्षक निलंबित केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को ‘बतोलेबाज’ कहने पर उनके ही संसदीय क्षेत्र विदिशा के एक शिक्षक, गोविंद सिंह कुशवाहा को निलंबित कर दिया गया है।
दरअसल, एक स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता ने संसद में दिए शिवराज सिंह के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। इस पर शिक्षक गोविंद सिंह ने टिप्पणी करते हुए लिखा- बतोलेबाज है, झूठों की प्रतियोगिता कराई जाए तो ये पूरे देश में नंबर वन आएंगे।
इस टिप्पणी के बाद शिक्षक के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। उन्हें नोटिस भी जारी किया गया। इसके बाद शिक्षा विभाग ने उनकी टिप्पणी को अभद्र, अशोभनीय और आपत्तिजनक मानते हुए निलंबन की कार्रवाई कर दी।
हालांकि, शिक्षक का कहना है कि उनकी सोशल मीडिया आईडी खुली रह गई थी और किसी ने साजिश के तहत यह कमेंट कर दिया। जानकारी मिलने पर उन्होंने उसे हटा भी दिया था। उनका दावा है कि जो उन्होंने किया ही नहीं, उसकी सजा उन्हें दी जा रही है। इस मामले में कोर्ट भी जा सकता हूं।
इससे पहले टीकमगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री करने पर भी एक शिक्षक पर इसी तरह की कार्रवाई हुई थी।
खरी बात यह है कि जब आप सरकारी मुलाजिम होते हैं, तो सरकार पर टिप्पणी करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। क्योंकि सरकार ताकतवर होती है और ऐसे मामलों में निलंबन जैसे झटके भी लग सकते हैं।
अजय सिंह बोले- कांग्रेस से जिसे जाना हो चले जाए हाल ही में टीकमगढ़ पहुंचे पूर्व नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक अजय सिंह ने मीडिया के एक सवाल पर कहा कि जो लोग कांग्रेस में रहने लायक नहीं हैं, वे चले जाएं। अगर कल जाना है तो आज ही चले जाएं। हमें तो छोटा परिवार, सुखी परिवार चाहिए।
अब उनके इस बयान को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोग कह रहे हैं कि बात अगर किसी एक परिवार की हो तो ठीक है, लेकिन पार्टी की हो तो परिवार बड़ा ही होना चाहिए। भाजपा को देखो, जिसने दूसरे दलों के नेताओं को शामिल कर अपना राजनीतिक परिवार लगातार बढ़ाया है।
लोग यह भी सलाह दे रहे हैं कि अजय सिंह ने 2028 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने का लक्ष्य रखा है, तो इसके लिए संगठन का विस्तार जरूरी होगा। छोटा परिवार, सुखी परिवार की नीति से काम चलना मुश्किल है।
वहीं, अजय सिंह इन दिनों लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं और प्रदेश में दौरे कर रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर भी उनका बयान चर्चा में है। उन्होंने कहा कि वे फुर्सतिया आदमी हैं, कोई खास काम नहीं है, इसलिए घूम रहे हैं।
