मसूर की फसल में ‘अज्ञात लाल/काला रोग’ से सूखने की समस्या पर त्वरित निदान हेतु आपातकालीन पत्र।
महोदय,
हम आपका ध्यान हमारे क्षेत्र के किसानों की आजीविका पर आए इस गंभीर संकट की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। पिछले दो वर्षों से मसूर की फसल में फ्लावरिंग (फूल आने) और (फलियां भरने) की अवस्था में एक विशेष प्रकार का रोग फैल रहा है, जो महामारी का रूप ले चुका है।
समस्या का विवरण:
• लक्षण: फसल हरी-भरी दिखने के बावजूद अचानक लाल/कत्थई रंग की होकर सूखने लगती है। पत्तियां समय से पहले गिर जाती हैं और फलियों में दाने नहीं बन पाते।
• इस रोग के कारण 50% से 80% तक मसूर की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है।
• किसानों द्वारा बाजार में उपलब्ध विभिन्न फफूंदनाशकों का प्रयोग किया गया, किंतु कोई भी प्रभावी परिणाम नहीं मिला। इससे प्रतीत होता है कि यह किसी नए ‘म्यूटेंट फंगस’ या ‘सॉइल बोर्न पैथोजन’ (मिट्टी जनित रोग) का हमला है।
संस्थानों से विशेष अपेक्षाएं::
i. प्रभावित खेतों से ‘रूट सैंपल’ (जड़) और ‘सॉइल सैंपल’ लेकर प्रयोगशालाओं में इसकी कल्चर टेस्टिंग करें।
ii. यह पता लगाया जाए कि क्या यह ‘फ्यूसेरियम विल्ट’ है या ‘रूट रॉट’ का कोई नया प्रकार, ताकि आगामी सीजन के लिए प्रतिरोधी किस्में (Resistant Varieties) सुझाई जा सकें , एवं संस्थान इस क्षेत्र के लिए एक विशेष ‘सॉइल ट्रीटमेंट चार्ट’ जारी करें।
महोदय, दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के सरकारी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इस रोग का समाधान अनिवार्य है। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसान इस लाभप्रद फसल से पूरी तरह विमुख हो जाएंगे।
मसूर की फसल रोग से हो रही है नष्ट
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