राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्ष पूर्ण होने पर हटा में निकला ‘राष्ट्रोदय पथ संचलन’

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राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्ष पूर्ण होने पर हटा में निकला ‘राष्ट्रोदय पथ संचलन’

6 वर्ष की बालिकाओं से लेकर 70 वर्ष की वरिष्ठ सेविकाओं ने लिया हिस्सा, नगर में जगह-जगह पुष्पवर्षा कर हुआ स्वागत

हटा /दमोह-* कदमों में अनुशासन, चेहरे पर आत्मविश्वास और मन में राष्ट्रसेवा का संकल्प। विजयादशमी के अवसर पर हटा नगर में राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘राष्ट्रोदय पथ संचलन’ में नारीशक्ति की एकजुटता देखने को मिली। गणवेश में निकली सेविकाओं ने कदम से कदम मिलाकर अनुशासन, संगठनात्मक एकता और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया।

 

संचलन में 6 वर्ष की बालिकाओं से लेकर 70 वर्ष की वरिष्ठ सेविकाओं तक ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। नगर में विभिन्न स्थानों पर सामाजिक संगठनों और नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर सेविकाओं का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
भूतेश्वर मंदिर परिसर में हुआ विजयादशमी उत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ भूतेश्वर मंदिर प्रांगण में विजयादशमी उत्सव एवं शस्त्र-शास्त्र पूजन के साथ हुआ। इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों ने विधिवत पूजन-अर्चन किया। इसके पश्चात गणवेशधारी सेविकाओं का पथ संचलन प्रारंभ हुआ।


पथ संचलन के दौरान सेविकाओं के कदमों में अनुशासन और चेहरे पर आत्मविश्वास नजर आया। नगर के विभिन्न मार्गों से निकले संचलन का जगह-जगह स्वागत किया गया। विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं नगर के बंधु-भगिनियों ने पुष्पवर्षा कर सेविकाओं का उत्साहवर्धन किया। पूरे आयोजन के दौरान नगर में उत्साह और सांस्कृतिक गौरव का वातावरण दिखाई दिया।
90 वर्षों की यात्रा नारीशक्ति के जागरण और संस्कार निर्माण को समर्पित कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति की प्रांत कार्यालय प्रमुख मेघा ताम्रकार ने अपने उद्बोधन में समिति की 90 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेविका समिति नारीशक्ति के जागरण, संस्कार निर्माण और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। राष्ट्रसेवा, सामाजिक जागरूकता और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए समिति का योगदान महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि साधना, संस्कार और सकारात्मक प्रयासों के माध्यम से समाज में बदलाव लाना समिति का प्रमुख उद्देश्य है। नारी की भूमिका केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, कार्यक्षेत्र और समाज में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए महिलाएं राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।


उन्होंने सेवाभाव, निरंतरता और दायित्वबोध को महिलाओं की सामाजिक भूमिका का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनके अनुसार, महिलाओं की सक्रिय सहभागिता से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के साथ ही सांस्कृतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ किया जा सकता है।
रानी लक्ष्मीबाई, जीजाबाई और अहिल्याबाई के आदर्शों का किया उल्लेख अपने संबोधन में मेघा ताम्रकार ने वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई, माता जीजाबाई और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन एवं आदर्शों का उल्लेख करते हुए भारतीय नारी के साहस, त्याग, नेतृत्व क्षमता और सांस्कृतिक मूल्यों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सम्मान, संस्कार और सामर्थ्य का प्रतीक माना गया है। महिलाओं में निहित क्षमताओं को जागृत कर उन्हें समाजसेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यों से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। संस्कारों से युक्त और अपने दायित्वों के प्रति सजग महिलाएं समाज में सकारात्मक बदलाव की वाहक बन सकती हैं। अतिथियों ने समिति के कार्यों की सराहना की कार्यक्रम का शुभारंभ जिला कार्यवाहिका सविता उपाध्याय के प्रास्ताविक उद्बोधन से हुआ। मुख्य अतिथि रौशनी अग्रवाल, संचालिका गुरुकृपा स्कूल, ने आयोजन की सराहना करते हुए राष्ट्र सेविका समिति के कार्यों और सेविकाओं के समर्पण की प्रशंसा की।


इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों ने शस्त्र-शास्त्र पूजन किया। कार्यक्रम में उपस्थित सेविकाओं ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ सहभागिता निभाई।नगर में जगह-जगह पुष्पवर्षा कर हुआ अभिनंदन राष्ट्रोदय पथ संचलन के दौरान हटा नगर के विभिन्न मार्गों पर सामाजिक संगठनों एवं नगरवासियों ने सेविकाओं का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। स्वागत के दौरान नगर में उत्साह का माहौल रहा। लोगों ने सेविकाओं के अनुशासित संचलन और सामूहिक सहभागिता का अभिनंदन किया।

संचलन का समापन गायत्री मंदिर प्रांगण में हुआ। कार्यक्रम के अंत में नगर कार्यवाहिका वंदना शर्मा ने उपस्थित अतिथियों, सेविकाओं, सामाजिक संगठनों और नगरवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। 90 वर्ष की अखंड साधना, प्रभाव से परिवर्तन की ओर’ का संकल्प राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित राष्ट्रोदय पथ संचलन ने नारीशक्ति के जागरण, अनुशासन, राष्ट्रसेवा, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सहभागिता का संदेश दिया। छह वर्ष की नन्हीं बालिकाओं से लेकर 70 वर्ष की वरिष्ठ सेविकाओं की सहभागिता ने पीढ़ियों के बीच संस्कारों और संगठनात्मक परंपरा की निरंतरता को प्रदर्शित किया।
‘90 वर्ष की अखंड साधना, प्रभाव से परिवर्तन की ओर’ के संकल्प के साथ आयोजित इस कार्यक्रम ने नारीशक्ति की सामूहिक भागीदारी और समाज के प्रति दायित्वबोध को रेखांकित किया। हटा में निकले इस पथ संचलन के माध्यम से राष्ट्र सेविका समिति की 90 वर्षों की यात्रा, सेवा भावना और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को प्रस्तुत किया गया।

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