दंदरौआ ग्राम बहुत छोटा ग्राम है। यह ग्वालियर संभाग के जिला भिण्ड के तहसील मेंहगाँव के अन्तर्गत मेंहगाँव से 19.7 किलोमीटर ( बस या निजी वाहन से मात्र 23 मिनट) की दूरी पर ग्राम-धमौरी और चिरौली के मध्य स्थित है। राजमार्ग से ये मात्र आधा किलोमीटर की दूरी पर पश्चिम दिशा में स्थित है। ये ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना, दतिया सभी स्थानों से सीधे सड़क मार्ग से जुड़ा है। ग्वालियर शहर से बाया गोहद लगभग 65 किलोमीटर, बाया, मेंहगाँव लगभग 75 किलोमीटर बाया बड़ा गाँव और बाया बेहट-मौ लगभग 60-65 किलोमीटर की दूरी पर सड़क मार्गों से जुड़ा है।
दंदरौआ गाँव 900 बीघा की कृषि और 900 बीघा की अन्य आवासीय, गौ चारण, बनोपज रखने वाला छोटा सा गाँव है। उसके पश्चिम उत्तर के कोण से लगा हुआ डॉ हनुमान जी का विशाल मंदिर है। इस मंदिर के पास 55 हेक्टेयर (लगभग 136 एकड़) जमीन का मालिकाना हक है। वृन्दावन,अयोध्या चित्रकूट,उज्जैन ग्वालियर आदि स्थानों में भी दंदरौआ धाम आश्रम है। मंदिर में संस्कृत एवं संगीत महाविद्यालय है। 1000 श्रद्धालुओं की क्षमता वाले सत्संग हाल, विशाल गौ-शाला, उद्यान, तालाब, भण्डार कक्ष, प्रसादालय, धर्मशालायें अतिथि गृह, जल हेतु टंकी, विद्युत, दूरसंचार टॉवर, यज्ञ हवनादि शालायें, वाहन एवं अन्य कृषि उपकरण आदि आवश्यक साधन उपलब्ध हैं।
दंदरौआ धाम के डॉ हनुमान मंदिर के ब्रह्मलीन संत श्री श्री 1008 महन्त बाबा श्री पुरुषोत्तम दास जी महाराज ने अपने जीवन काल मे ही, अपने विश्वास पात्र शिष्य श्री रामनरेश को 12 अगस्त 1985 में कंठी माला, गुरुमंत्र दे कर धाम का अधिकारी महन्त बना कर उन्हें रामदास नाम दिया था, और संत रामदास जी ने अपनी विद्वता और हिंदू धर्म के प्रचार प्रसार में अहम भूमिका निभा कर संतों की उपाधि “महामंडलेश्वर” प्राप्त की, तब से ही इस 500 वर्ष प्राचीन श्री हनुमान मंदिर एवं श्री रामजानकी मंदिर का जीर्णोद्धार प्रारंभ हुआ। और आज ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड आफ इंडिया’ में नाम दर्ज करा चुका है।
मंदिर परिसर क्षेत्र लगभग 5000 फीट लम्बी बाउन्ड्री बाल से घिरा हुआ है। इसमें दो मुख्य द्वार श्रद्धालुओं के आगमन के लिये और दो अन्य द्वार, गौशाला एवं डॉ. हनुमान चिन्ताहरण उद्यान, डॉ. हनुमान संत निवास, ब्याधिहरण तालाब, डॉ. हनुमान दिव्य धर्मशाला आदि बनाये जा चुके है। और इसका नवीनीकरण सदैव जारी रहता है। इस की बाऊन्ड्री बाल के अन्दर मुख्य मंदिर परिसर है जिसके पूर्व एवं उत्तर दिशा में दो मुख्य द्वार है। मंदिर का गर्भ ग्रह जहाँ श्रद्धालुओं को भगवान के दिव्य दर्शन भजन, यजन पूजनादि के लिए रखा गया है, वही मुख्य से मंदिर परिसर गर्भगृह तक जाने के मार्ग, अंदर का पूरा मंदिर परिसर टीन शेड से छायादार बनाया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को भगवान व किसी भी देवी-देवता के दर्शन में किसी भी मौसम में किसी तरह की परेशानी न उठाना पड़े।
भगवान के प्रसाद, पुष्पादि के विक्रेता, की दुकानों को भी ब्यवस्थित किया गया है, ताकि श्रद्धालुओं के रास्ते मे दुकानों में लगने वाली भीड़ से उन्हें परेशानी न हो और दुकान वाले भी अपना प्रसाद और फूलमाला इत्यादि आसानी से बेच सकें।
यज्ञादि कर्म कराने वाले श्रद्धालुओं के लिए यज्ञ शाला, पूर्व और उत्तर के ईशान कोण में विशाल सैकड़ों छायादार वृक्षों से आक्षादित उद्यान तथा उत्तर के मुख्य द्वार से लगा लगभग 1000 श्रद्धालुओं की क्षमता का विशाल सत्संग हाल जिसके लिए अलग से शुलभ शौचालय भी बनवाये गये है।
उत्तर दिशा के मुख्य द्वार से मुख्य मंदिर के द्वार तक का लगभग 120 मीटर का रास्ता, व पश्चिम से पूरब की ओर मंदिर को जाने वाला लगभग 200 मीटर का रास्ता पूरी तरह से ट्रांसपेरेन्ट सीट से ढका गया है, ताकि बरसात और धूप आदि में श्रद्धालुओं को मुख्य मंदिर परिसर में आने में असुविधा न हो।
