कही देर न हो जाए
मासूम हुई कुपोषण का शिकार
हटा दमोह

सरकार के द्वारा कुपोषण को दूर करने के उद्देश्य से गांव गांव में स्वास्थ्य से संबंधित मैदानी कार्यकर्ता नियुक्त किये जो रहे है, जिन्हे समय समय पर प्रशिक्षण ज्ञान के साथ पोषणाहार भी दिया जाता है कि कही किसी मासूम का वजन कम हो रहा हो तो उसकी देखभाल आदि हो सके
आवश्यकता पड़ने पर मासूम को खण्ड स्तर की अस्पताल में भर्ती किया जाए। जहां मासूम की गहन चिकित्सा हो सके। लेकिन निरक्षरता, जागरूकता का आभाव एवं कुछ हद तक गरीबी के कारण अभी भी मासूमों को कुपोषण का शिकार होना पड़ रहा है।
ऐसा ही कुछ प्रकरण हटा अनुविभाग के वर्धा मड़ियादों में देखने मिला जहां तीन वर्षीय दिव्यांषी का वजन दिनों दिन कम हो रहा है। वर्धा निवासी पूनम बिरजू उर्फ बृजकिशोर आदिवासी की यह तीसरी बेटी है। तीनों बेटियों के जन्म में एक से डेढ वर्ष का अंतर है। यह दम्पति रोजगार की तलाश में समय समय पर महानगर आता जाता रहता है।
दिव्यांषी के वजन कम होने की जानकारी जब गांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को लगी तो उसने दिव्यांषी को हटा के पोषण पुर्नवास केन्द्र में भर्ती कराया। अपेक्षानुसार स्वास्थ्य में सुधार न होने साथ ही मासूम में टीव्ही के लक्षण पाये जाने पर उसे दमोह जाने को कहा गया।
मासूम की पारिवारिक स्थिति कमजोर है, बेटी अस्वस्थ्य है और उसका पिता मजदूरी के लिए बाहर गया हुआ है।
हटा परियोजना अधिकारी शिव राय ने बताया कि टीकाकरण समय पर हुआ है, उसे एनआरसी में भर्ती किया यदि उसे दमोह भेजा जाता है तो वहां उसके इलाज की समुचित व्यवस्था की जायेगी।
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