नरवाई की आग न्यायलय तक पहुंची: केबल जलने से 3 घंटे ठप रहा कामकाज आरोपी सोहेल खान पर केस, 1 लाख रुपए का नुकसान

नरवाई की आग न्यायलय तक पहुंची: केबल जलने से 3 घंटे ठप रहा कामकाज आरोपी सोहेल खान पर केस, 1 लाख रुपए का नुकसान देवेंद्र रघुवंशी, चाणक्य न्यूज गंजबासौदा।

नरवाई की आग न्यायलय तक पहुंची: केबल जलने से 3 घंटे ठप रहा कामकाज आरोपी सोहेल खान पर केस, 1 लाख रुपए का नुकसान देवेंद्र रघुवंशी, चाणक्य न्यूज गंजबासौदा।

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आरोपी सोहेल खान पर केस, 1 लाख रुपए का नुकसान
देवेंद्र रघुवंशी, चाणक्य न्यूज गंजबासौदा। जिले में नरवाई (पराली) जलाने की लापरवाही अब खतरनाक रूप ले चुकी है। शुक्रवार को रजोदा गांव में खेत में लगाई गई आग तेज हवा के चलते फैलते हुए नवीन न्यायालय परिसर तक पहुंच गई। आग की लपटों ने न्यायालय की विद्युत केबल लाइन को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे पूरी बिजली व्यवस्था ठप हो गई और करीब तीन घंटे तक अदालत का कामकाज बंद रहा। न्यायालय के नाजिर की रिपोर्ट पर देहात थाना पुलिस ने मामले में सोहेल खान (पिता सलीम खान), निवासी गंजबासौदा देहात को आरोपी बनाते हुए प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान आरोपी द्वारा खेत में नरवाई जलाने के कारण ही आग फैलकर न्यायालय परिसर तक पहुंची थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार को नवीन न्यायालय परिसर के पास एक बड़ा हादसा घठित होने से बच गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे खेत में लगाई गई थी। शुरुआत में यह सीमित दायरे में थी, लेकिन दोपहर तक हवा तेज होने लगी और आग ने विकराल रूप ले लिया। सूखी नरवाई और तेज हवाओं ने आग को तेजी से फैलाया और यह एक खेत से दूसरे खेत में कूदती हुई न्यायालय परिसर की बाउंड्री तक पहुंच गई जिसने न्यायालय परिसर में लगी विद्युत केबल लाइन आग की चपेट में आकर जल गई। इससे परिसर की पूरी बिजली सप्लाई बंद हो गई। कोर्ट कक्षों में चल रही सुनवाई अचानक रोकनी पड़ी और वकील, पक्षकार व कर्मचारी बाहर निकल आए। लगभग तीन घंटे तक न्यायिक कामकाज पूरी तरह ठप रहा। एफआईआर के मुताबिक, आग से स्ट्रीट लाइट और विद्युत केबल को गंभीर नुकसान हुआ है। प्रारंभिक आकलन में करीब 50 हजार से 1 लाख रुपए के नुकसान की बात सामने आई है।
दमकल और कर्मचारियों की मशक्कत से बुझी आग
घटना की सूचना मिलते ही देहात थाना पुलिस और नगर पालिका की दमकल टीम मौके पर पहुंची। दो फायर ब्रिगेड ने करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान न्यायालय कर्मचारियों ने भी पानी, रेत और अन्य संसाधनों से आग बुझाने में सहयोग किया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया जाता, तो न्यायालय भवन और रिकॉर्ड रूम तक नुकसान पहुंच सकता था। न्यायालय के नाजिर विक्की सोनी की शिकायत पर आरोपी सोहेल खान पर देहात थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
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जिले में बेकाबू नरवाई की आग, 195 किसानों पर कार्रवाई
कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बावजूद विदिशा जिले में नरवाई जलाने की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। हालात यह हैं कि जिला प्रदेश में नरवाई जलाने के मामलों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। अकेले गंजबासौदा तहसील में पिछले एक महीने में 195 किसानों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है। प्रशासन अब जुर्माना और कानूनी कार्रवाई के साथ सख्ती बरतने के मूड में है। नरवाई की आग का असर अब पशुधन पर भी दिखने लगा है। सिरोंज तहसील के इमलानी गांव में स्थित एक गौशाला में नरवाई की आग पहुंचने से रखा हुआ दो सौ ट्रॉली भूसा जलकर राख हो गया। इस घटना से गौशाला संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार आग अचानक फैली और कुछ ही देर में भूसे के ढेर को अपनी चपेट में ले लिया। हाल ही में नगर के समीप एक अन्य गौशाला भी नरवाई की आग की चपेट में आने से बची। आग ने गौशाला को चारों ओर से घेर लिया था, लेकिन समय रहते नगर पालिका की फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंच गई और आग पर काबू पा लिया गया। नगर पालिका अध्यक्ष शशि अनिल यादव ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। गौशाला के अध्यक्ष पंडित देवेंद्र भार्गव ने बताया कि यदि समय पर आग नहीं बुझती, तो बड़ा हादसा हो सकता था और कई गौवंश इसकी चपेट में आ सकते थे।

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वैज्ञानिक नजरिए से समझें, नरवाई जलाना क्यों खतरनाक
विशेषज्ञों और कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नरवाई जलाने के नुकसान केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सीधे खेती की उत्पादकता को प्रभावित करता है। आग से मिट्टी का जैविक कार्बन जल जाता है, जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति घटती है। मिट्टी की उर्वरता में गिरावट आती है। नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे जरूरी तत्व नष्ट हो जाते हैं। सूक्ष्म जीवों का विनाश जैसे लाभकारी बैक्टीरिया और केंचुए खत्म हो जाते हैं, जो मिट्टी को जीवंत बनाए रखते हैं। बार-बार जलाने से मिट्टी सख्त हो जाती है और पानी सोखने की क्षमता घटती है। कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, मिथेन और PM2.5 जैसे खतरनाक कण हवा में फैलते हैं।
अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई जलाने के बजाय वैकल्पिक उपाय जैसे मल्चर, हैप्पी सीडर या जैविक खाद बनाने की तकनीक अपनाएं, ताकि खेत की उर्वरता भी बनी रहे और ऐसे हादसों से बचा जा सके।

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आरोपी सोहेल खान पर केस, 1 लाख रुपए का नुकसान
देवेंद्र रघुवंशी, चाणक्य न्यूज गंजबासौदा।

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