विदिशा: सेवा की जगह मिला तिरस्कार, पुलिस पंचायत में छलका बुजुर्गों का दर्द

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जिला ब्यूरो राजेंद्र विश्वकर्मा

विदिशा। बुढ़ापे की लाठी बनने का वादा करने वाले जब खुद बोझ समझने लगें, तो समाज की नैतिकता पर सवाल उठना लाजिमी है। विदिशा में आयोजित ‘पुलिस पंचायत’ के दौरान कुछ ऐसे ही झकझोर देने वाले मामले सामने आए, जहाँ संपत्ति तो अपनों के नाम हो गई, लेकिन बुजुर्गों के हिस्से में सिर्फ बेबसी आई।
1. 50 बीघा जमीन देकर भी 100 रुपये की मोहताज
पुलिस पंचायत में सबसे चौंकाने वाला मामला एक बुजुर्ग महिला का रहा। महिला ने अपनी ममता और भरोसे में आकर अपनी 50 बीघा की बेशकीमती जमीन बेटे के नाम कर दी थी। उम्मीद थी कि शेष जीवन सम्मान से बीतेगा, लेकिन जमीन मिलते ही बेटे के तेवर बदल गए।
शिकायत: बुजुर्ग महिला ने बताया कि इतनी बड़ी संपत्ति होने के बावजूद उसे गुजारे के लिए मात्र 100 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं।
कार्रवाई: पुलिस अधिकारियों ने बेटे को तलब कर कड़ी फटकार लगाई और ‘माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम’ के तहत कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।
2. विकलांग बेटे और पिता के बीच कलह
एक अन्य संवेदनशील मामले में एक बुजुर्ग पिता और उनके विकलांग बेटे के बीच का विवाद सामने आया। शारीरिक अक्षमता और पारिवारिक तनाव ने दोनों के जीवन को नर्क बना दिया है। घर में आए दिन होने वाले विवादों के कारण बुजुर्ग पिता मानसिक रूप से टूट चुके हैं। पुलिस पंचायत ने दोनों पक्षों को बैठाकर आपसी समन्वय और सहानुभूति के साथ रहने की समझाइश दी।
3. दबंगों का कहर: बुजुर्ग को खेती से रोका
सिर्फ घर के अंदर ही नहीं, बाहर भी सीनियर सिटीजन सुरक्षित नहीं हैं। एक बुजुर्ग ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके दबंग पड़ोसी उनकी ही जमीन पर उन्हें खेती करने से रोक रहे हैं।
विवाद: पड़ोसी द्वारा जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश की जा रही है और बुजुर्ग को डराया-धमकाया जा रहा है।
समाधान: पुलिस ने मौके पर जाकर जांच करने और राजस्व विभाग के साथ समन्वय कर बुजुर्ग को उनकी जमीन का हक दिलाने का आश्वासन दिया है।
पुलिस पंचायत की पहल: समाधान की कोशिश
पुलिस पंचायत के माध्यम से इन मामलों को सुलझाने का प्रयास किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों का हनन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
“हमारा प्रयास है कि बुजुर्गों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर न लगाने पड़ें और आपसी संवाद से उनकी समस्याओं का समाधान हो सके। संपत्ति लेने के बाद माता-पिता को बेसहारा छोड़ना न केवल अनैतिक है, बल्कि कानूनी अपराध भी है।”
— पुलिस पंचायत समन्वयक
निष्कर्ष: विदिशा की यह पुलिस पंचायत समाज के लिए एक आईना है, जो दर्शाती है कि संपत्ति के लोभ में मानवीय रिश्ते किस कदर दम तोड़ रहे हैं। स्थानीय प्रशासन अब इन मामलों में वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित कर रहा है ताकि बुजुर्गों को उनका खोया हुआ सम्मान वापस मिल सके।

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