राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जो लोग संघ को गलत ठहरा रहे हैं या उसके बारे में अनाप बनास बातें करते हैं वह संघ की शाखा में आवे और समझे

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जो लोग संघ को गलत ठहरा रहे हैं या उसके बारे में अनाप बनास बातें करते हैं वह संघ की शाखा में आवे और समझे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कार्यप्रणाली और वित्तीय स्रोतों के बारे में जानकारी नीचे दी गई है:


### कार्य करने का तरीका
आरएसएस मुख्य रूप से अपनी ‘शाखा’ पद्धति के माध्यम से काम करता है। यह एक विकेंद्रीकृत (decentralized) सामाजिक आंदोलन की तरह कार्य करता है, न कि किसी औपचारिक व्यावसायिक संगठन की तरह।
* *शाखा (Shakha):* संघ की सबसे छोटी और आधारभूत इकाई ‘शाखा’ है। यह प्रतिदिन स्थानीय स्तर पर (आमतौर पर पार्कों या खुले मैदानों में) एक घंटे के लिए आयोजित की जाती है। इसमें शारीरिक व्यायाम, योग, अनुशासन, बौद्धिक चर्चा और देशभक्ति गीत जैसे कार्यक्रम होते हैं।
* *उद्देश्य:* संघ का घोषित उद्देश्य ‘व्यक्ति निर्माण’ और ‘राष्ट्र निर्माण’ है। वे हिंदू समाज को संगठित करने और सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने पर जोर देते हैं।
* *पिरामिड संरचना:* इसका संचालन एक अनुशासित पदानुक्रम में होता है, जिसमें सबसे ऊपर ‘सरसंघचालक’ होते हैं, जो संगठन का मार्गदर्शन करते हैं।
* *स्वयंसेवक:* संघ में जुड़ने के लिए कोई औपचारिक सदस्यता फॉर्म या शुल्क नहीं होता है। जो व्यक्ति नियमित शाखा में भाग लेते हैं, उन्हें ‘स्वयंसेवक’ कहा जाता है।
### वित्तीय स्रोत
संघ के वित्तपोषण का प्राथमिक और मुख्य स्रोत *’गुरु दक्षिणा’* है।
* *गुरु दक्षिणा (Guru Dakshina):* साल में एक बार स्वयंसेवक अपनी स्वेच्छा से जो भी आर्थिक योगदान देते हैं, उसे ‘गुरु दक्षिणा’ कहा जाता है। यह धनराशि पूरी तरह से स्वैच्छिक होती है।
* *परस्परता का सिद्धांत (Principle of Mutuality):* आयकर विभाग और अदालतों (जैसे पटना उच्च न्यायालय, 1994) के फैसलों के अनुसार, संघ को ‘परस्परता के सिद्धांत’ के आधार पर आयकर से छूट प्राप्त है। कानूनी रूप से इसे इस तरह देखा जाता है कि चूँकि यह राशि स्वयंसेवकों द्वारा ही एकत्रित की जाती है और उन्हीं के साझा उद्देश्यों पर खर्च की जाती है, इसलिए यह लाभ कमाने वाली व्यावसायिक गतिविधि नहीं है।
* *विकेंद्रीकृत वित्त:* संघ की वित्तीय संरचना अत्यधिक विकेंद्रीकृत है। स्थानीय शाखाएं वित्तीय रूप से काफी हद तक स्वतंत्र होती हैं और उनके पास अपने खर्चे संभालने की व्यवस्था होती है।
### कानूनी स्थिति
संघ ने अपने इतिहास में कई प्रतिबंधों का सामना किया है (जैसे गांधीजी की हत्या के बाद 1948 में, आपातकाल के दौरान 1975 में), जिसके कारण संगठन ने अपने शुरुआती दिनों से ही एक अनौपचारिक संरचना बनाए रखने का विकल्प चुना ताकि वह राज्य के दमन के प्रति लचीला बना रहे। संगठन के रूप में संघ का अपना कोई पंजीकरण नहीं है, क्योंकि भारतीय कानूनों के तहत पंजीकरण केवल तब आवश्यक होता है जब कोई संस्था सरकारी अनुदान लेना चाहती हो, विदेशी चंदा (FCRA के तहत) स्वीकार करना चाहती हो या सीमित देयता (limited liability) का लाभ उठाना चाहती हो। संघ सीधे तौर पर विदेशी चंदा स्वीकार नहीं करता है।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का मुख्य उद्देश्य भारतीय समाज में अनुशासन, सेवा और राष्ट्रवाद की भावना को प्रोत्साहित करना है। संघ के अनुसार, उनका कार्य किसी व्यक्ति विशेष या पार्टी के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के हित के लिए है।
संघ द्वारा देश हित में किए जाने वाले प्रमुख कार्यों को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
### 1. सामाजिक सेवा और कल्याण (Social Service)
* *शिक्षा:* संघ से जुड़े संगठन, जैसे ‘विद्या भारती’ और ‘एकल विद्यालय’, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार कर रहे हैं। ये विद्यालय दूरदराज के इलाकों में बुनियादी और मूल्य-आधारित शिक्षा प्रदान करते हैं।
* *स्वास्थ्य:* ‘सेवा भारती’ जैसे संगठनों के माध्यम से संघ देश भर में चिकित्सा शिविर, अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां स्वास्थ्य सुविधाएं कम हैं।
* *आपदा प्रबंधन:* प्राकृतिक आपदाओं, जैसे बाढ़, भूकंप या अन्य राष्ट्रीय संकटों के समय संघ के स्वयंसेवक राहत और बचाव कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।
### 2. सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रवाद
* *सांस्कृतिक पहचान:* संघ का मानना है कि भारत की शक्ति उसकी संस्कृति और सभ्यतागत मूल्यों में निहित है। यह संगठन हिंदू संस्कृति और ‘हिंदुत्व’ के विचारों को बढ़ावा देकर समाज को अपनी जड़ों और पहचान पर गर्व करने के लिए प्रेरित करता है।
* *अनुशासन और चारित्रिक निर्माण:* दैनिक ‘शाखाओं’ के माध्यम से युवाओं को शारीरिक व्यायाम, अनुशासन और सामूहिक सेवा का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका लक्ष्य एक अनुशासित और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करना है।
### 3. सामाजिक समरसता
* संघ समाज में एकता और समरसता को बढ़ावा देने का कार्य करता है। इसका उद्देश्य विभिन्न जातियों और वर्गों के बीच की दूरियों को कम करके समाज को एक सूत्र में बांधना है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ समाज के सभी वर्गों के साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया जाता है।
### 4. राष्ट्र निर्माण की विचारधारा
* संघ का मूल मंत्र *”इदं राष्ट्राय, इदं न मम”* (यह राष्ट्र के लिए है, यह मेरे लिए नहीं है) है। यह स्वयंसेवकों को ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ काम करने के लिए प्रेरित करता है।
* संघ के अनुसार, उनका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है, बल्कि वे एक सांस्कृतिक संगठन के रूप में काम करते हैं जो ऐसे नागरिकों का निर्माण करना चाहता है जो राष्ट्र के प्रति समर्पित हों।
### 5. अन्य संगठनों के माध्यम से योगदान
संघ स्वयं सीधे तौर पर राजनीतिक गतिविधियों में संलग्न नहीं होता, लेकिन ‘संघ परिवार’ के अंतर्गत आने वाले विभिन्न संगठन (जैसे भारतीय जनता पार्टी, भारतीय मजदूर संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद आदि) शिक्षा, राजनीति, मजदूर कल्याण और छात्र राजनीति जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रहते हैं।
संक्षेप में, संघ का कार्य एक सांस्कृतिक और सामाजिक आधार तैयार करना है, ताकि भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ एक मजबूत, अनुशासित और सशक्त राष्ट्र के रूप में उभर सके।
चाणक्य न्यूज़ इंडिया ✍️

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