*सिद्धपीठ मां ब्रह्मचारिणी: काशी का वह प्राचीन धाम जहां दर्शनों से मिट जाते दुख दर्द मिलता सुख और यश, संतान की कामना होती पूरी*
*!!.शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन माँ दुर्गा जी के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की होती पूजा व आराधना.!!*मप्र रटेड हेड एस के पटैल चाणक्य न्यूज़ इंडिया*
विश्व में सिद्धपीठ मां ब्रह्मचारिणी जी का मंदिर काशी के सप्तसागर (कर्णघंटा) क्षेत्र में गंगा किनारे बालाजी घाट पर स्थित है l दुर्गा की पूजा के क्रम में ब्रह्मचारिणी देवी का दर्शन-पूजन बहुत महत्वपूर्ण माना गया है l काशी शहर वाराणसी जिले में, उत्तर प्रदेश, भारत में गंगा नदी के तट पर स्थित है । यह शहर हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है, और भारत के प्राचीनतम शहरों में से एक है ।
*सुबह से ही लग जाती है भीड़……*
काशी के गंगा किनारे बालाजी घाट पर स्थित मां ब्रह्मचारिणी स्वयंभू प्रतिमा है । यहां पर मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है l श्रद्धालु लाइन में लगकर मां का दर्शन प्राप्त करते हैं l श्रद्धालु मां के इस रूप का दर्शन करने के लिए नारियल, चुनरी, माला फूल आदि लेकर श्रद्धा-भक्ति के साथ अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं l
*मां के दर्शन करने से मिलती है परब्रह्म की प्राप्ति……*
ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यन्त भव्य है l इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बायें हाथ में कमंडल रहता है l जो देवी के इस रूप की आराधना करता है उसे साक्षात परब्रह्म की प्राप्ति होती है l मां के दर्शन मात्र से श्रद्धालु को यश और कीर्ति प्राप्त होती है l
*हर मनोकामना होती है पूरी…….*
यहां ना सिर्फ काशी बल्कि विदेशी सैलानी एवं श्रद्धालु दर्शन व पूजन के लिए आते हैं l नवरात्रि पर तो इस मंदिर में लाखों भक्त मां के दर्शन करने के लिए आते हैं l ऐसी मान्यता है कि मां के इस रूप का दर्शन करने वालों को संतान सुख मिलता है, साथ ही वो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं l
*सुख शांति और संतान की कामना होती है पूरी……*
मां के दर्शन से जीवन में सुख-शांति, कीर्ति और उमंग के साथ ही संतान की कामना पूरी होती है। श्रद्धालु मां को नारियल, चुनरी और फूल-माला अर्पित करते हैं। काशी ही एक ऐसी जगह है, जहां देवी दुर्गा अपने अलग-अलग रूपों में विराजमान हैं। मां का दर्शन कर मन को असीम शांति मिली है।
सिद्धपीठ मां ब्रह्मचारिणी: काशी का वह प्राचीन धाम जहां दर्शनों से मिट जाते दुख दर्द मिलता सुख और यश, संतान की कामना होती पूरी*
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